दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम के विरोध में 23 मई को बिरसा चौक में सांकेतिक प्रदर्शन

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दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम के विरोध में 23 मई को बिरसा चौक में सांकेतिक प्रदर्शन

जमशेदपुर, 22 मई : विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने 24 मई 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले तथाकथित “जनजाति सांस्कृतिक समागम” को आदिवासी समाज के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कार्यक्रम बताया है। संगठनों का आरोप है कि यह आयोजन भाजपा एवं आरएसएस समर्थित विचारधारा के तहत प्रायोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समाज की वास्तविक मांगों, विशेषकर अलग धर्म कोड (सरना धर्म कोड) को नजरअंदाज करना है।

इसके विरोध में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार 23 मई को शाम 05 बजे साकची स्थित बिरसा चौक, जमशेदपुर में एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। संगठनों ने कहा कि आदिवासी समाज वर्षों से अपनी स्वतंत्र धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान की संवैधानिक मान्यता की मांग कर रहा है। झारखंड विधानसभा द्वारा सरना धर्म कोड से संबंधित प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके उलट, आदिवासी संस्कृति को केवल मंचीय नृत्य, पारंपरिक पोशाक और सांस्कृतिक प्रदर्शनों तक सीमित कर प्रस्तुत किया जा रहा है।

संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा आयोजित इस प्रकार के “लुभावने सांस्कृतिक कार्यक्रमों” का विरोध करते हुए कहा कि केवल बड़े मंच, सांस्कृतिक शो और प्रचार आधारित आयोजनों से आदिवासी समाज की वास्तविक समस्याएं समाप्त नहीं होंगी। आदिवासी समुदाय आज भी जल-जंगल-जमीन, विस्थापन, वनाधिकार, शिक्षा, बेरोजगारी, स्थानीय भाषा संरक्षण और धार्मिक पहचान जैसे गंभीर सवालों से जूझ रहा है, लेकिन इन मुद्दों पर सरकार की चुप्पी लगातार बनी हुई है। संगठनों का कहना है कि आदिवासी समाज की पहचान केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति आधारित जीवन-दर्शन, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, सामुदायिक अस्तित्व और अलग धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है।

ऐसे आयोजनों के माध्यम से आदिवासी समुदाय की राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक मांगों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में आदिवासी समाज के सम्मान और संस्कृति की चिंता करती है, तो उसे सबसे पहले सरना धर्म कोड, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, वनाधिकार कानून, विस्थापन और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए। विरोध प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र-युवाओं, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और आम नागरिकों की भागीदारी होगी। कार्यक्रम के संबंध में प्रशासन को पूर्व सूचना देकर आवश्यक सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध किया गया है

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