जनसेवा और सादगी की मिसाल बनीं मेयर सुधा गुप्ता, सरकारी सुविधाओं का त्याग कर खींच दी आदर्श की नई रेखा

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जमशेदपुर, 06 अप्रैल : मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता ने पदभार ग्रहण करते ही एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसकी खूब सराहना हो रही है। उन्होंने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए सरकारी सुविधाओं में कटौती और संसाधनों के पारदर्शी उपयोग का निर्देश जारी कर एक नई मिसाल कायम की है।

मेयर सुधा गुप्ता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नगर निगम के संसाधनों का उपयोग केवल जनता की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, न कि फिजूलखर्ची और अनावश्यक सुख-सुविधाओं पर। उनके इस फैसले को आम जनता के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों द्वारा भी सराहा जा रहा है।

जारी निर्देश के अनुसार, उन्होंने अपने लिए उपलब्ध सभी सरकारी वाहनों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने को कहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह जनसेवा का कार्य निजी वाहन से करना पसंद करेंगी। इसके साथ ही उन्होंने मेयर पद के लिए मिलने वाले मानदेय को स्वेच्छा से त्यागते हुए उसे मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने का निर्देश दिया है, ताकि जरूरतमंद लोगों की सहायता हो सके।

मेयर ने अपने कार्यालय के लिए किसी भी प्रकार की विशेष व्यवस्था से इनकार करते हुए सादगीपूर्ण कार्यालय व्यवस्था को ही पर्याप्त बताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी प्रकार के अतिरिक्त खर्च से बचा जाए और हर एक रुपये का उपयोग जनता के हित में किया जाए।

इसके अलावा, नगर निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी सादगी अपनाने का निर्देश दिया गया है। मेयर ने अतिथियों के स्वागत में गुलदस्ता देने की परंपरा समाप्त कर उसके स्थान पर पौधा या पुस्तक देने की नई परिपाटी शुरू करने का सुझाव दिया है, जो पर्यावरण संरक्षण और ज्ञानवर्धन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

मेयर सुधा गुप्ता का यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सादगी का उदाहरण है, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों के लिए एक प्रेरणास्रोत भी है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि सच्ची जनसेवा सुविधाओं का लाभ लेने में नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण में निहित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सभी जनप्रतिनिधि इसी सोच के साथ कार्य करें, तो निश्चित रूप से विकास की गति तेज होगी और जनता का भरोसा शासन-प्रशासन पर और मजबूत होगा।

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