बाघमुंडी, 02 अप्रैल : बाघमुंडी विधानसभा क्षेत्र में सरहुल जैसे पारंपरिक पर्व को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा प्रत्याशी रहिदास महतो के एक बयान ने आदिवासी संगठनों को नाराज़ कर दिया है, जिसके बाद कई संगठनों ने एकजुट होकर प्रेस वार्ता में कड़ा विरोध दर्ज कराया।
दरअसल, कालिमाटी में आयोजित सरहुल महोत्सव और उसी दिन झालदा के ईचाग क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस की जनसभा के बीच दिए गए बयान में रहिदास महतो ने आरोप लगाया था कि सरहुल आयोजन का संबंध अभिषेक बनर्जी के कार्यक्रम से है। उन्होंने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस ने राष्ट्रपति का अपमान किया है इसलिए अब आदिवासी समाज TMC के विरोध में है।
हालांकि, इस बयान को आदिवासी संगठनों ने पूरी तरह खारिज कर दिया। मानभूम आदिवासी भूमिज मुंडा कल्याण समिति समेत कई संगठनों ने स्पष्ट कहा कि सरहुल एक सांस्कृतिक और सामाजिक पर्व है, जिसे राजनीतिक रंग देना न सिर्फ अनुचित बल्कि आदिवासी परंपराओं का अपमान है। संगठनों ने यह भी दावा किया कि रहिदास महतो को कार्यक्रम में औपचारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया गया था। प्रेस वार्ता में पश्चिम बंगाल भूमिज डेवलपमेंट बोर्ड के उपाध्यक्ष रामपद सिंह सरदार और आदिवासी नेता अखिल सिंह सरदार समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने एक स्वर में इस बयान की निंदा करते हुए इसे आदिवासी अस्मिता से जोड़कर देखा।
इधर, कालिमाटी से बाघमुंडी ब्लॉक के सचिव डॉ. सुरेश सिंह बाबू ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संयम बरतने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।इस विवाद ने साफ कर दिया है कि बाघमुंडी में अब सांस्कृतिक आयोजनों पर भी राजनीतिक बयानबाज़ी का असर दिखने लगा है, जिससे क्षेत्र का माहौल गर्माता जा रहा है।