पटमदा में पेसा नियमावली लागू होने पर आभार सभा, 1996 के ऐतिहासिक कानून को मिला ज़मीनी रूप

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पटमदा में पेसा नियमावली लागू होने पर आभार सभा, 1996 के ऐतिहासिक कानून को मिला ज़मीनी रूप

जमशेदपुर /पटमदा, 25 दिसंबर : झारखंड राज्य में पेसा नियमावली–2025 के लागू होने को लेकर पटमदा प्रखंड के बेलटाँड़ चौक पर गुरुवार को भव्य आभार सभा का आयोजन किया गया। जनसभा में वक्ताओं ने पेसा कानून के ऐतिहासिक संघर्ष, इसके संवैधानिक महत्व तथा अब नियमावली लागू होने के बाद इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से विचार रखे।

सभा को संबोधित करते हुए विधायक प्रतिनिधि चंद्रशेखर टुडू ने कहा कि पेसा नियमावली लागू होने के बाद ग्राम सभा की भूमिका अब केवल सलाहकार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे निर्णायक अधिकार प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि अब ग्राम सभा को जल, जंगल और ज़मीन से जुड़े मामलों में निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा। खनन, भूमि अधिग्रहण, विकास योजनाओं तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होगी। साथ ही पारंपरिक रीति-रिवाज, सामाजिक व्यवस्था और स्थानीय विवाद निपटारे को संवैधानिक मान्यता मिलने से आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और धर्म की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित होगी।

सामाजिक कार्यकर्ता विश्वनाथ महतो ने कहा कि 24 दिसंबर 1996 को संसद द्वारा पारित पेसा कानून आदिवासी अस्मिता और स्वशासन की रक्षा का मजबूत आधार था, लेकिन नियमावली के अभाव में यह कानून वर्षों तक सीमित दायरे में ही सिमटा रहा। अब नियमावली लागू होने से अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को वास्तविक सशक्तता मिलेगी और संवैधानिक मूल्यों के साथ-साथ स्वाभिमान को भी प्राथमिकता मिलेगी।

वहीं अमर सिंह सरदार ने पेसा कानून के ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समाज को स्वशासन, ग्राम सभा की सर्वोच्चता और पारंपरिक अधिकारों की संवैधानिक मान्यता देना था। लगभग तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद पेसा नियमावली–2025 के लागू होने से अब यह अधिकार वास्तविक रूप में ज़मीन पर उतर सका है।

सभा के दौरान जीतू मुर्मू ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित करने वाला ऐतिहासिक कदम है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने “न लोकसभा, न विधानसभा – सबसे ऊँचा ग्राम सभा”, “जय ग्राम सभा”, “जय संविधान” के गगनभेदी नारों के साथ पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।

सभा में विधायक प्रतिनिधि चंद्रशेखर टुडू, ग्राम प्रधान संघ के बृंदावन दास, ग्राम प्रधान टीकाराम मुर्मू, मथुर महतो, सुखदेव हेंब्रम, बुद्धेश्वर टुडू, धरणीधर महतो, अरुण मांडी, बिरसा हांसदा, हरि सोरेन, वीरसिंह बेसरा, शंभनाथ सोरेन, कालीराम सिंह, शत्रुघ्न सिंह, निर्मल सिंह, बिपिन सिंह, संतोष सिंह, संजय सिंह, स्वपन महतो, सुधीर हांसदा, मिठू सहित कई ग्राम प्रधान, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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