पर्यटन विकास की आड़ में वन दोहन का आरोप, ग्राम सभाओं की अनदेखी पर नाराजगी

चांडिल, 08 दिसंबर : दलमा अभ्यारण्य में प्रस्तावित 200 फीट लंबे ग्लास ब्रिज, रोपवे और अन्य पर्यटन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम सभाओं में तीखी नाराजगी उभर रही है। दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच, कोल्हान ने आरोप लगाया है कि पर्यटन विकास के नाम पर वन दोहन हो रहा है तथा ग्राम सभाओं की सहमति के बिना निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है, जो वनाधिकार कानून के विरुद्ध है।
मंच के सचिव सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि वन विभाग दलमा को “टूरिस्ट-फ्रेंडली” बनाने के प्रयास में स्थानीय समुदायों को नजरअंदाज कर रहा है। उनके अनुसार, बिना ग्राम सभा की अनुमति के काम कराना वनाधिकार कानून की अवहेलना है। पेड़ कटाई और भारी मशीनरी के उपयोग से पहाड़ी क्षेत्रों की संरचना और वन्यजीवों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अभ्यारण्य उनकी सांस्कृतिक धरोहर, जीविका और परंपरागत अधिकारों से जुड़ा क्षेत्र है, लेकिन विभाग बार-बार की गई लिखित आपत्तियों का जवाब भी नहीं दे रहा।
प्रस्तावित परियोजनाओं पर पर्यावरणविदों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से हाथियों के प्राकृतिक विचरण मार्ग प्रभावित होंगे और वन्यजीवों की गतिविधियां कम होंगी। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि परियोजनाओं को तत्काल नहीं रोका गया और ग्राम सभाओं से अनिवार्य परामर्श नहीं किया गया, तो ग्रामीण बड़े पैमाने पर आंदोलन, धरना और जन-जागरूकता अभियान शुरू करेंगे।
स्थानीय समुदायों का स्पष्ट कहना है कि वे विकास विरोधी नहीं हैं, लेकिन जंगल-जमीन की कीमत पर कोई विकास स्वीकार नहीं है। स्थानीय समुदायों का कहना है कि यदि पर्यटन विकास जरूरी है तो पहले पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, सामाजिक सर्वे और ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।



