केंद्रीय मंत्री का कार्यक्रम बनते ही दुरुस्त होने लगी बदहाल टोल रोड — एनएचएआई की लापरवाही उजागर

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केंद्रीय मंत्री का कार्यक्रम बनते ही दुरुस्त होने लगी बदहाल टोल रोड — एनएचएआई की लापरवाही उजागर

मानभूम अपडेट्स डेस्क

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के कार्यक्रम की घोषणा होते ही अचानक सक्रिय हुए एनएचएआई के अधिकारी। महीनों से बदहाल पड़ी टाटा–रांची फोरलेन टोल रोड पर मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। चांडिल प्रखंड के पाटा टोल प्लाजा के आसपास सड़क के गड्ढे अब भरे जा रहे हैं, जबकि इसी मार्ग पर लंबे समय से लोगों की परेशानियों को एनएचएआई ने अनदेखा किया था।

केंद्रीय मंत्री मंगलवार को करेंगे स्थल निरीक्षण

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे पाटा टोल प्लाजा पहुंचकर एनएचएआई और विभागीय अधिकारियों के साथ सड़क की स्थिति और टोल संचालन की समीक्षा करेंगे। इस दौरान सड़क सुरक्षा, यात्रियों की सुविधाएं, शौचालय, पेयजल, विश्राम गृह और दिशा-सूचक बोर्ड जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की जाएगी।

मंत्री के दौरे से पहले एनएचएआई की ‘सफाई मोहीम’

महीनों से लोगों की शिकायतों के बावजूद खामोश रही एनएचएआई अब मंत्री के आगमन से पहले सड़क दुरुस्ती में जुट गई है। चांडिल गोलचक्कर से पाटा टोल तक सड़क के गड्ढों को भरने और समतलीकरण का काम सोमवार को पूरे दिन मशीनों से कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मंत्री का दौरा तय नहीं होता, तो शायद यह मरम्मत कार्य अब तक शुरू भी नहीं होता।

जाम और हादसों से जूझते रहे यात्री

बरसात के दौरान इस टोल रोड की हालत इतनी खराब रही कि दो किलोमीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को 2 से 5 घंटे तक लग जाते थे। कई बार एंबुलेंस भी घंटों जाम में फंसी रही, जिससे मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने बताया कि वे कई बार एनएचएआई और टोल प्रबंधन को शिकायतें दे चुके हैं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

अधूरा ब्रिज बना सिरदर्द

चांडिल गोलचक्कर के पास रेलवे लाइन पर बन रहा पुल अब भी अधूरा है। इस कारण वाहन अब भी पुरानी और जर्जर सड़क पर चलने को मजबूर हैं। एक किलोमीटर से अधिक हिस्से में सड़क पर अनगिनत गड्ढे हैं, जिनसे होकर गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं।

एनएचएआई की कार्यशैली पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन सड़क की हालत किसी ग्रामीण कच्चे रास्ते से बेहतर नहीं। अब जब केंद्रीय मंत्री के आने की खबर फैली, तभी विभाग को सड़क याद आई।
यह दिखाता है कि एनएचएआई केवल “वीआईपी विज़िट” के लिए सक्रिय होता है, जनता की परेशानी उसके लिए कोई मायने नहीं रखती।

जनता की मांग – जवाबदेही तय हो

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि एनएचएआई और टोल संचालक कंपनी की जवाबदेही तय की जाए। “जब तक सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक जनता यूं ही परेशान होती रहेगी,” चांडिल निवासी एक व्यावसायी ने कहा।

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