वन विभाग के कार्यक्रम पर ग्रामीणों का सवाल — “ग्राम सभा की अनुमति बिना रन फॉर गजराज कैसे?”
चांडिल, 06 अक्टूबर : दलमा क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग द्वारा आयोजित “रन फॉर गजराज” कार्यक्रम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच के सह सचिव डॉ. सत्य नारायण मुर्मू ने आरोप लगाया है कि बिना ग्राम सभा की अनुमति के इतना बड़ा आयोजन किया जाना विभाग की मनमानी को दर्शाता है।
डॉ. मुर्मू ने कहा कि वन विभाग लंबे समय से ईको सेंसिटिव ज़ोन में ग्रामीणों पर एकतरफा नियम थोप रहा है, जबकि जब भी ग्रामीण सवाल करते हैं तो विभाग कोई स्पष्ट जवाब नहीं देता।
उन्होंने सवाल उठाया कि रन फॉर गजराज में झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्यों के प्रतिभागियों को क्यों शामिल किया गया? क्या यह जानबूझकर किया गया था ताकि बाहरी अनुभवी धावक प्रतियोगिता जीतें?
उनके अनुसार, दलमा क्षेत्र के 135 गांवों को ईको सेंसिटिव ज़ोन में शामिल किया गया है, इसलिए केवल इन्हीं गांवों के युवाओं को इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति होनी चाहिए थी।
“अगर हमारे इलाके के युवाओं को ही मौका मिलता, तो आज का चैंपियन हमारे गांवों में से कोई होता और इससे क्षेत्र में खेल के प्रति सकारात्मक संदेश जाता,” – डॉ. सत्य नारायण मुर्मू
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों रुपये की फुटबॉल प्रतियोगिताएं होती हैं, तब बाहरी खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति नहीं दी जाती ताकि स्थानीय प्रतिभा को पहचान और प्रोत्साहन मिल सके।
डॉ. मुर्मू ने वन विभाग से यह भी पूछा कि जब विभाग खुद ईको सेंसिटिव ज़ोन के नाम पर ग्रामीणों पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाता है, तो ऐसे क्षेत्र में इस तरह के बाहरी आयोजन की क्या आवश्यकता थी? उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा — “विभाग टी-शर्ट बांटकर कौन-सा संदेश देना चाहता है? कहीं दलमा का हाल भी छत्तीसगढ़ के हसदेव या झारखंड के सारंडा जंगल जैसा तो नहीं करने की तैयारी है?”
ग्रामीणों का कहना है कि अगर वन विभाग सच में स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनाना चाहता है, तो उसे पहले ग्राम सभाओं का सम्मान करना होगा और हर निर्णय में स्थानीय जनता की सहमति लेनी चाहिए।