चांडिल अनुमंडलीय न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला : पांच हत्याओं के दोषी चुनु मांझी को फांसी की सजा, कोर्ट परिसर में बनी नजीर
चांडिल, 25 सितंबर : चांडिल अनुमंडलीय न्यायालय ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पांच हत्याओं के दोषी चुनु मांझी उर्फ पुतुल मांझी को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने इसे दुर्लभतम श्रेणी का अपराध करार देते हुए धारा-302 भा०द०वि० में फांसी और 20 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा-427 भा०द०वि० में दो साल कैद की सजा दी। यह चांडिल अनुमंडलीय न्यायालय का पहला मामला है, जिसमें किसी अपराधी को फांसी की सजा सुनाई गई है।
इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सचिन्द्र नाथ सिन्हा की अदालत में हुई। मामले का संचालन प्रभारी अपर लोक अभियोजक हर्षवर्धन ने किया। अभियोजन पक्ष ने घटना को जघन्य और दुर्लभ प्रकृति का अपराध मानते हुए अदालत से फांसी की सजा की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
यह मामला 23 फरवरी 2019 का है। वादी सिद्धु सोरेन के बयान के आधार पर दर्ज एफआईआर में कहा गया था कि तड़के करीब 4 बजे अभियुक्त चुनु मांझी कुल्हाड़ी लेकर अपने घर आया और दरवाजे पर वार करने लगा। उसने कहा कि उसने रवि मांझी, कल्पना उर्फ पानवती और उनके तीन बच्चों – जितेंद्र, सुरेश और पुखराज की हत्या कर दी है और वादी को भी जान से मार देगा। दरवाजा खोलने पर उसने वादी और उसकी पत्नी पर भी हमला किया। इसके बाद उसने घर और मोटरसाइकिल में आग लगा दी। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया था।
घटना की जांच स०अ०नि० रोपना राम कांसरी ने की। जांच के दौरान एफएसएल से प्राप्त साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को अदालत में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कुल 11 गवाहों की गवाही कराई। वहीं घटना में प्रयुक्त हथियार (कुल्हाड़ी) भी कपाली ओ०पी० के माध्यम से न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने अभियुक्त चुनु मांझी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ ही चांडिल अनुमंडलीय न्यायालय के इतिहास में पहली बार किसी आरोपी को फांसी की सजा दी गई है।