16 साल बाद भी बदहाल कुकड़ू! शिलान्यास और कार्यादेश के बावजूद अधर में PHC भवन का निर्माण

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धरने पर बैठे आंदोलनकारी, 14 अक्टूबर से भूख हड़ताल की चेतावनी – प्रशासन के आश्वासन पर फिलहाल स्थगित हुआ आंदोलन

 

कुकड़ू, 13 अक्टूबर : सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड में बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्वीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) भवन का निर्माण शुरू नहीं होने के विरोध में मंगलवार को प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित धरने में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और कृषि समेत कई मुद्दों को लेकर प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई गई। आंदोलनकारियों ने 14 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी थी। हालांकि, चांडिल के अनुमंडल पदाधिकारी के प्रतिनिधि द्वारा त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद इसे फिलहाल अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया।

16 साल बाद भी स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था का इंतजार

आंदोलनकारियों ने कहा कि वर्ष 2009 में नीमडीह की चार और ईचागढ़ की पांच पंचायतों को मिलाकर कुकड़ू प्रखंड का गठन किया गया था। इसके बावजूद 16 साल बीत जाने के बाद भी यहां बुनियादी सुविधाओं और स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था का अभाव है। अधिकांश विभागों का संचालन दूसरे प्रखंडों के पदाधिकारियों के अतिरिक्त प्रभार से हो रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

शिलान्यास हुआ, कार्यादेश जारी, फिर भी निर्माण शुरू नहीं

धरने का प्रमुख मुद्दा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण रहा। ग्रामीणों के अनुसार, जिला परिषद की ओर से 15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य मद से भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इसके लिए करीब 1.96 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित करने, टेंडर प्रक्रिया पूरी करने, संवेदक का चयन करने और कार्यादेश जारी करने के साथ शिलान्यास एवं भूमि पूजन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र बनने से कुकड़ू की नौ पंचायतों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा। फिलहाल इलाज के लिए लोगों को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जाना पड़ता है।

छह सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन

धरने के दौरान आंदोलनकारियों ने छह सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए पीएचसी भवन का निर्माण तत्काल शुरू करने, सभी विभागों में स्थायी पदों का सृजन करने, तिरुलडीह थाना को कुकड़ू स्थानांतरित करने तथा झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में विषयवार शिक्षिकाओं और महिला सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति की मांग की। इसके अलावा कृषि प्रधान क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज और अतिरिक्त विद्युत सब-स्टेशन बनाने तथा जेएसएलपीएस से जुड़ी महिला कर्मियों को बीमा, यात्रा भत्ता और मोबाइल भत्ता देने की मांग उठाई गई।

झारखंड आंदोलनकारी एवं जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील कुमार महतो ने कहा कि शिलान्यास और कार्यादेश जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उपायुक्त की ओर से जांच की बात कही गई थी, लेकिन रिपोर्ट सामने नहीं आई। उन्होंने विधायक और सांसद से भी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कहा कि पीएचसी नहीं होने के कारण क्षेत्र में डॉक्टरों और नर्सों की स्थायी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को पूर्व सूचना दिए जाने के बावजूद धरने के दिन कार्यालय में उनकी अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जताई।

वहीं, विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने आरोप लगाया कि पीएचसी भवन के लिए प्रस्तावित जमीन को लेकर भी विवाद की स्थिति है। उनके अनुसार, वीरान पहाड़ी क्षेत्र में भवन ले जाने की तैयारी की जा रही है, जहां हाथियों का आतंक रहता है। उन्होंने इसे कुकड़ू की जनता के हितों के खिलाफ बताया।

धरना-प्रदर्शन में दुबराज महतो, प्राण चंद्र महतो, आशीष कुमार महतो, गंगाधर महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष शामिल हुए। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन के आश्वासन पर है। देखना होगा कि पीएचसी भवन का निर्माण कब शुरू होता है और अन्य मांगों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।

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