नीमडीह : जंगली हाथियों के प्रकोप से दहशत में ग्रामीण, मशाल लेकर खेतों की रखवाली कर रहे सैकड़ों लोग
नीमडीह, 16 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र के ग्रामीण इन दिनों जंगली हाथियों के बढ़ते प्रकोप से दहशत में जी रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब ग्रामीणों को अपने धान की फसल और घरों की सुरक्षा के लिए रात में मशाल और पटाखे लेकर खेतों में उतरना पड़ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, हाथियों का एक बड़ा झुंड लगातार कई गांवों में घूम रहा है। खेतों में लगे धान के बिचड़े और तैयार फसल को हाथी रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। किसानों के महीनों की मेहनत पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते हाथियों को रोका नहीं गया, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी और किसान भारी नुकसान झेलेंगे।
शनिवार की रात नीमडीह थाना क्षेत्र के कुशपुतुल गांव में जैसे ही हाथियों का झुंड पहुंचा, ग्रामीण तुरंत इकट्ठा हो गए। हाथियों को भगाने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग मशाल, ढोल और पटाखों के साथ खेतों की ओर दौड़ पड़े। ग्रामीणों की कोशिशों से हाथी गांव से बाहर तो चले गए, लेकिन यह कार्य अत्यंत जोखिम भरा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी कभी भी पलटवार कर सकते हैं और इस दौरान जान पर भी खतरा मंडराता है।
गांव में पहले भी हाथियों ने कई बार लोगों को निशाना बनाया है। हाल ही में बाइक पर सवार दो व्यक्तियों पर हाथियों ने हमला कर दिया था। गनीमत रही कि दोनों किसी तरह बाल-बाल बच गए। इस घटना के बाद से ही लोग और अधिक भयभीत हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग हाथियों को गांव से दूर रखने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। अब तक न तो कोई प्रभावी रणनीति बनाई गई है और न ही सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार उन्हें ही अपनी जान जोखिम में डालकर हाथियों को भगाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि हाथियों को नियंत्रित करने और उन्हें आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही फसल बर्बाद होने पर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी की जा रही है।