Ichagarh Politics : पंडाल आजसू का, चर्चा हरेलाल की! सम्मेलन में भी छाए रहे ‘बागी बाबू’
नीमडीह, 10 अक्टूबर : राजनीति भी गजब का खेल है! मंच किसी का, माइक किसी का, झंडा किसी का और पंडाल का खर्च भी उसी का, लेकिन महफिल में चर्चा किसी और की! ईचागढ़ की सियासत में शनिवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। नीमडीह के रघुनाथपुर में आजसू पार्टी ने विधानसभा स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया, मगर कार्यक्रम की चर्चा में पार्टी से इस्तीफा दे चुके हरेलाल महतो ही छाए रहे। कुल मिलाकर, पंडाल आजसू का था, मंच आजसू का था, लेकिन राजनीतिक पटकथा के मुख्य किरदार हरेलाल महतो बने रहे।
कहावत है कि ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’, लेकिन रघुनाथपुर के सम्मेलन में तो मामला ही उलटा नजर आया। यहां नाम लेने वाले आजसू के नेता थे और नाम था हरेलाल महतो का! सम्मेलन का मकसद भले ही यह संदेश देना रहा हो कि हरेलाल महतो के पार्टी छोड़ने से आजसू के संगठन पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन भाषणों का रुख देखकर लगा कि पार्टी को सबसे ज्यादा फिक्र भी उन्हीं की है।
दरअसल, आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो के निर्देश पर आयोजित इस सम्मेलन से पार्टी ईचागढ़ में अपनी ताकत दिखाना चाहती थी। संदेश साफ था—एक नेता के जाने से संगठन कमजोर नहीं होता। मगर सम्मेलन में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति उम्मीदों के अनुरूप नहीं दिखने की चर्चा ने सियासी गलियारों में सवाल खड़े कर दिए। जिस कार्यक्रम से संगठन की मजबूती का संदेश देना था, वहां हरेलाल महतो की राजनीतिक मौजूदगी उनके पार्टी में न रहते हुए भी महसूस होती रही।
हरेलाल गए, मगर भाषणों से नहीं गए!
सम्मेलन की सबसे दिलचस्प तस्वीर मंच से सामने आई। नेताओं के भाषणों में बार-बार हरेलाल महतो का जिक्र होता रहा। किसी ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंता जताई, तो किसी ने आजसू में हजारों हरेलाल महतो पैदा करने का दावा कर दिया। यानी हरेलाल महतो के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ने का संदेश देने के लिए भी हरेलाल महतो का ही सहारा लेना पड़ा!
अब सियासत का यह गणित भी कम दिलचस्प नहीं है। अगर हरेलाल महतो के जाने से संगठन पर कोई असर नहीं पड़ा, तो फिर सम्मेलन में उनका नाम बार-बार लेने की जरूरत क्यों पड़ी? और अगर पार्टी में हजारों हरेलाल पैदा करने का दावा करना पड़ा, तो क्या ईचागढ़ की राजनीति में एक हरेलाल की अहमियत खुद-ब-खुद जाहिर नहीं हो गई?
बहरहाल, सम्मेलन के जरिए आजसू ने अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने की कोशिश की, लेकिन चर्चा का केंद्र हरेलाल महतो ही बने रहे। कार्यक्रम का मंच भले ही आजसू के नेताओं से सजा था, मगर सियासी सुर्खियों में हरेलाल महतो की ही तस्वीर उभरती रही।
ईचागढ़ की राजनीति का फिलहाल यही दिलचस्प दृश्य है—हरेलाल महतो मंच पर नहीं थे, पार्टी में भी नहीं थे, लेकिन सम्मेलन के भाषणों में उनकी मौजूदगी किसी मुख्य अतिथि से कम नहीं दिखी। अब सवाल यह है कि आजसू ईचागढ़ में अपनी ताकत दिखा रही है या अनजाने में हरेलाल महतो की राजनीतिक अहमियत को और ज्यादा चर्चा में ला रही है?



