जमशेदपुर की सड़कों पर चौथा डहरे टुसु परब, बराबरी और लोक संस्कृति का उत्सव

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जमशेदपुर की सड़कों पर चौथा डहरे टुसु परब, बराबरी और लोक संस्कृति का उत्सव

जमशेदपुर, 30 दिसंबर : जमशेदपुर में आगामी 4 जनवरी 2026 को चौथे डहरे टुसु परब का आयोजन किया जाएगा। इससे पूर्व इसके तीन आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहर के लोगों की व्यापक भागीदारी रही है।

डोड़कासाईं, आसानबोनी में आयोजित तैयारी बैठक में दीपक रंजीत ने कहा कि डहरे टुसु परब कोई नई परंपरा नहीं, बल्कि टुसु के मूल दर्शन की वापसी है, जो प्रकृति, अन्न और श्रम से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि टुसु को मंच, मूर्ति और वीआईपी संस्कृति तक सीमित करना लोकसंस्कृति की गलत व्याख्या है।

बैठक में धनंजय महतो ने कहा कि डहरे टुसु परब प्रतियोगिता और असमानता के खिलाफ एक सांस्कृतिक आंदोलन है, जहाँ सभी बराबरी से चलते हैं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए बनमली महतो ने बताया कि इस बार हजारों लोग पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-धमसा के साथ परब में शामिल होंगे। डहरे टुसु परब में न मंच होता है, न बैरियर और न ही वीआईपी संस्कृति, जहाँ टुसु को देखा नहीं, बल्कि जिया जाता है।

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