प्रकृति की पाठशाला बना ‘मड एंड मीडोज़’, भावी शिक्षकों ने सीखे सतत जीवनशैली के गुर

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जमशेदपुर, 06 जून : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन की एनएसएस इकाई एवं इको क्लब के तत्वावधान में बी.एड. विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों ने पहाड़भांगा स्थित ‘मड एंड मीडोज़ फार्म’ का शैक्षणिक भ्रमण किया। भ्रमण का उद्देश्य भावी शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण, सतत जीवनशैली और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व से व्यावहारिक रूप से अवगत कराना था।

दौरे के दौरान विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं पर्यावरणविद् डॉ. विक्रांत तिवारी से संवाद किया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी एवं आईआईएम कोलकाता के पूर्व छात्र डॉ. तिवारी ने ‘परमाकल्चर’ (स्थायी कृषि) की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वास्तविक विकास वही है, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़े। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर जीवनशैली को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।

लगभग सात एकड़ में फैले ‘मड एंड मीडोज़ फार्म’ में विद्यार्थियों ने प्राकृतिक जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं को देखा। फार्म के भवन मिट्टी, गोबर और हल्दी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ गर्मियों में भी अपेक्षाकृत ठंडे रहते हैं। फार्म में धान, दाल, आलू, प्याज एवं हरी सब्जियों की खेती के अलावा रुद्राक्ष, कॉफी, रक्त चंदन और महोगनी जैसे पौधों का भी संरक्षण किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने फार्म परिसर में आम, अमरूद, लीची, कटहल और चंपा के पौधों का रोपण किया। इस दौरान कॉलेज प्रबंधन के चेयरपर्सन बी.आर. चंद्रशेखर, एडमिनिस्ट्रेशन चेयरपर्सन ललिता चंद्रशेखर, सचिव प्रिया धर्मराजन, सह-सचिव सुधा दिलीप, प्राचार्या डॉ. जूही समर्पिता तथा एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी पूनम कुमारी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का समापन फार्म में जैविक रूप से उगाई गई फसलों एवं सब्जियों से तैयार अल्पाहार के साथ हुआ। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की अवधारणाओं को व्यवहारिक रूप से समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।

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