
उपायुक्त ने बहु स्तरीय आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सक्रिय करने का दिया निर्देश, जिला प्रशासन अलर्ट मोड में
सरायकेला,29 जून : सरायकेला-खरसावां जिला के उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने संभावित आपदा जोखिम को ध्यान में रखते हुए जिले की समस्त कार्यपालक एवं तकनीकी इकाइयों को तत्काल प्रभाव से हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है. उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहते हुए सुनियोजित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिया है. रायरंगपुर सिंचाई प्रमंडल द्वारा अवगत कराया गया है कि हालिया तीव्र वर्षा और जलभराव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आईआईटी खड़गपुर की अनुशंसा पर ब्यांबिल जलाशय से निर्धारित मात्रा में जल छोड़ने का निर्णय लिया गया है. उक्त सूचना के मिलने के बाद ही जिला में हाई अलर्ट घोषित किया गया है.
उपायुक्त ने संवेदनशील क्षेत्र चिह्नित कर त्वरित निगरानी प्रारंभ करने के साथ ही स्वर्णरेखा/खरकई नदी और चांडिल डैम से सटे संभावित जलप्लावित क्षेत्रों की पहचान कर वार रूम आधारित निगरानी तंत्र सक्रिय करने का निर्देश दिया है.
संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी एवं नगर निकाय पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के जलग्रहण क्षेत्रों में माइकिंग, पर्चा वितरण, चौकीदार/दैनिक सेवकों के माध्यम से सतर्कता सूचना प्रसारित करें.
जल प्रदूषण की आशंका को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग को पीने के पानी की वैकल्पिक व सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था के लिए आवश्यक निर्देश दिया गया है. वहीं, कृषि, पशुपालन, मत्स्य एवं उद्यान विभागों को समन्वय कर संवेदनशील क्षेत्रों में सघन भ्रमण एवं फसल/पशुधन सुरक्षा हेतु सलाह और सहयोग प्रदान करने के लिए भी निर्देश दिया गया है.
सिविल सर्जन को निर्देश दिया गया है कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों को आपात सेवाओं के लिए तैयार रखा जाए एवं प्रभावित क्षेत्रों में एमएमयू एवं एम्बुलेंस की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. अपर उपायुक्त को जिला स्तरीय समन्वयक नियुक्त करते हुए निर्देश दिया गया है कि वे समस्त विभागों के बीच सूचना का त्वरित आदान-प्रदान एवं आवश्यक निर्णय क्रियान्वयन सुनिश्चित करें. अनुमंडल पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि की स्थिति में 24×7 राहत एवं आपूर्ति केंद्र सक्रिय किए जाएं तथा नागरिकों को सुरक्षित स्थलों तक स्थानांतरित करने की रणनीति पूर्व से तैयार रखें.



