चांडिल के शैक्षणिक संस्थान में श्रद्धापूर्वक मनाई गई भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि

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चांडिल, 09 जून : सरायकेला खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड के लुपुंगडीह स्थित एक शैक्षणिक संस्थान में मंगलवार को आदिवासी समाज के महानायक एवं धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर ने दीप प्रज्वलित कर एवं भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया।

इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जटाशंकर ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित कर अंग्रेजी शासन के खिलाफ ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ आंदोलन का नेतृत्व किया। उनका जीवन संघर्ष, न्याय और आत्मसम्मान की लड़ाई का प्रतीक है, जो आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा के विचार जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा तथा आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए आज भी प्रासंगिक हैं। वक्ताओं ने उनके जीवन, सामाजिक आंदोलनों, ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह, जनजातीय समाज में सुधार तथा उनकी असाधारण नेतृत्व क्षमता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि बिरसा मुंडा ने कम उम्र में ही समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण शुरू किया था। उन्होंने आदिवासी समाज में एकता, शिक्षा और स्वाभिमान का संदेश दिया तथा जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनकी नेतृत्व क्षमता के कारण जनजातीय समाज उन्हें भगवान के रूप में पूजता है। उनकी जयंती 15 नवंबर को देशभर में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।

इस दौरान छात्र-छात्राओं ने भी बिरसा मुंडा के जीवन और योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में एडवोकेट निखिल कुमार, शांति राम महतो, जयदीप पांडे, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, शुभम साहू, पवन महतो, अजय मंडल, गौरव कुमार महतो, कृष्ण पद महतो समेत कई गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन समाजसेवा, शिक्षा, संस्कृति संरक्षण और जनकल्याण के संकल्प के साथ हुआ।

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