आदिम जनजाति समुदाय की रैयती भूमि पर कथित अवैध कब्जे का आरोप, सुकलाल पहाड़िया ने कहा – जांच नहीं हुई तो होगा व्यापक आंदोलन
जमशेदपुर, 13 जुलाई :पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत हुरलुंग पंचायत के सबर टोला, मौजा लुपुगडीह में आदिम जनजाति समुदाय की भूमि पर कथित अवैध कब्जा का मामला चर्चाओं में आया है। इसको लेकर आदिवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
मामले की जानकारी प्राप्त होने पर, आदिवासी समाज के नेता सुकलाल पहाड़िया ने विलुप्तप्राय आदिम जनजाति सबर परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने सबर समाज के लोगों के साथ बैठक कर उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं भूमि संबंधी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की तथा हरसंभव सहयोग और जनभागीदारी के साथ उनके अधिकारों की रक्षा का भरोसा दिलाया।
बैठक में सबर परिवारों ने अपनी समस्याओं को रखते हुए आरोप लगाया कि वर्षों से जिन रैयती जमीनों पर उनका वैधानिक अधिकार है, उन जमीनों पर कथित बाहरी लोगों के संरक्षण में गांव के ही कुछ प्रभावशाली एवं सफेदपोश लोग कब्जा कराने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आदिम जनजाति सबर समाज अपने पुश्तैनी अधिकारों से वंचित हो जाएगा।
ग्रामीणों की बातें सुनने के बाद सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि सबर समाज पहले से ही विकास की मुख्यधारा से काफी पिछड़ा है। ऐसे में अब यदि उनकी पुश्तैनी एवं रैयती जमीनों पर भी अवैध कब्जे की कोशिश की जा रही है, तो यह आदिम जनजाति के अस्तित्व, आजीविका और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों के संरक्षण में गांव के ही कुछ सफेदपोश लोग सबर परिवारों की जमीन हड़पने की साजिश में लगे हुए हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन जमीनों पर पीढ़ियों से सबर परिवार खेती-बाड़ी एवं निवास करते आए हैं, उन जमीनों को कथित रूप से उनसे छीनने का प्रयास किया जा रहा है। यह केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि आदिम जनजाति के अधिकारों के हनन का गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
सुकलाल पहाड़िया ने जिला प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। जिन लोगों द्वारा सबर समाज की रैयती जमीनों पर कथित अवैध कब्जा किया गया है या कब्जे का प्रयास किया जा रहा है, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए जमीन वास्तविक रैयतों को वापस दिलाई जाए। साथ ही भविष्य में आदिम जनजाति की जमीनों पर किसी भी प्रकार के अवैध हस्तांतरण एवं कब्जे पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई नहीं करता है, तो ग्रामसभाओं, आदिवासी संगठनों एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। यह आंदोलन जल, जंगल, जमीन और आदिम जनजाति सबर समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बैठक के दौरान सबर परिवारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, राशन, रोजगार एवं सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी समस्याओं से भी अवगत कराया। सुकलाल पहाड़िया ने भरोसा दिलाया कि इन सभी मुद्दों को संबंधित विभागों एवं प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा ताकि सबर समाज को उनका अधिकार मिल सके।
इस अवसर पर गुरुचरण कर्मकार, गुरूदेव सबर, विराज सबर, गंगामुनी सबर, सावित्री सबर, संजय सबर, सुनील सबर, सुशील सबर, माधुरी सबर, छतर पहाड़िया सहित बड़ी संख्या में सबर समुदाय के महिला-पुरुष एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।