दिव्यांगता के अंधेरे में आत्मनिर्भरता की रोशनी, कंदरा माण्डी को मिली नई राह

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दिव्यांगता के अंधेरे में आत्मनिर्भरता की रोशनी, कंदरा माण्डी को मिली नई राह

जमशेदपुर /बहरागोड़ा, 31 जनवरी : संघर्षों से भरे जीवन में जब उम्मीदें धुंधली पड़ने लगें, तब संवेदना और सहयोग किसी वरदान से कम नहीं होते। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरक क्षण शनिवार को बहरागोड़ा प्रखंड के पाथरा पंचायत अंतर्गत गण्डानाटा (पुरनाडीह) गांव में देखने को मिला, जब दिव्यांग कंदरा माण्डी के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई किरण जली।

विगत कई वर्षों से दिव्यांगता से जूझ रहे कंदरा माण्डी का जीवन कठिनाइयों से भरा रहा है। रोजमर्रा की आजीविका के लिए उन्हें अपनी पत्नी गीता माण्डी के साथ बहरागोड़ा से चाकुलिया तक का लंबा और कष्टसाध्य सफर तय करना पड़ता था। यह यात्रा न केवल शारीरिक रूप से थकाने वाली थी, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें तोड़ देने वाली साबित होती रही। इन तमाम हालातों में उनकी पत्नी गीता माण्डी ने हर कदम पर उनका संबल बनकर साथ दिया।

इसी मानवीय पीड़ा को देखते हुए पंचायत समिति सदस्य गौतम कुमार मन्ना के आग्रह पर झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने पहल करते हुए कंदरा माण्डी को ट्राइसाइकिल प्रदान की। यह ट्राइसाइकिल उनके लिए सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वावलंबन और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का मजबूत आधार बनकर सामने आई है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने इस पहल को सामाजिक संवेदना का सशक्त उदाहरण बताया। मौके पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष शिवचरण हासदा, धनंजय मंडल, मार्शल वास्के, फागुनाथ वास्के, बाघराय बास्के, छोटे लाल माण्डी, सोमाय मुर्मु, शक्तिधर मंडल, शोभा माण्डी, सोमबारी माण्डी, मेघराय बास्के, यादुनाथ माण्डी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे प्रयास समाज में यह संदेश देते हैं कि दिव्यांगजन केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सहयोग और अवसर के भी हकदार हैं। ट्राइसाइकिल पाकर कंदरा माण्डी के चेहरे पर लौटी मुस्कान इस बात की गवाही थी कि थोड़े से सहयोग से किसी का जीवन नई दिशा पा सकता है।

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