जमशेदपुर : ड्रीम हाइट्स बिल्डिंग विवाद – वरिष्ठ अधिवक्ता ने बिल्डरों पर लगाया आपराधिक कदाचार का आरोप, उपायुक्त व जेएनएसी से की तत्काल कार्रवाई की मांग

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जमशेदपुर : ड्रीम हाइट्स बिल्डिंग विवाद – वरिष्ठ अधिवक्ता ने बिल्डरों पर लगाया आपराधिक कदाचार का आरोप, उपायुक्त व जेएनएसी से की तत्काल कार्रवाई की मांग

जमशेदपुर, 13 अगस्त : सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने उपायुक्त और जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) को पत्र लिखकर बिष्टुपुर स्थित “ड्रीम हाइट्स” बिल्डिंग के बिल्डरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिवक्ता के अनुसार, बिल्डरों ने न केवल अवैध मंजिलों का निर्माण किया, बल्कि साझा सुविधाओं पर कब्जा कर कानूनी मालिकों को प्रताड़ित भी किया।

अधिवक्ता श्रीवास्तव का आरोप है कि भेजी गई उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने से प्रोत्साहित होकर बिल्डरों — रंजीत मिश्रा और विजय कुमार — ने उनके शौचालय का पानी कनेक्शन काट दिया। उन्होंने कहा कि उनकी अनुपस्थिति में उनके कार्यालय का संचालन तीन महिला अधिवक्ता करती हैं, जिन्हें पानी कनेक्शन काटने से गंभीर परेशानी हो रही है।

शिकायत में कहा गया है कि “ड्रीम हाइट्स” के केवल दो मंजिलें ही कानूनी रूप से स्वीकृत हैं, लेकिन बिल्डरों ने पांच अतिरिक्त मंजिलें अवैध रूप से बना लीं। इन अवैध मंजिलों के फ्लैट बेचने के बाद भी बिल्डरों ने पूरी इमारत के साझा क्षेत्र, लिफ्ट, सीढ़ियां, पानी और बिजली पर कब्जा बनाए रखा है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि नगर निगम कानून के स्पष्ट उल्लंघन के बावजूद प्रशासन ने 2016 से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि माननीय झारखंड हाई कोर्ट ने 2017 में जुस्को को उन्हें अलग बिजली कनेक्शन देने और 2023 में पानी का पुनः कनेक्शन बहाल करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। अधिवक्ता का कहना है कि यह आचरण भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत दंडनीय है, और प्रशासन की चुप्पी “मिलीभगत” के रूप में देखी जा सकती है।

उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि तत्काल अवरोध हटाकर वेंटिलेशन बहाल किया जाए, पानी कनेक्शन जोड़ा जाए और दोषी बिल्डरों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

ज्ञात हो कि जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित ड्रीम हाइट्स बिल्डिंग पर ही वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव का निजी कार्यालय है।

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