जल-जंगल-जमीन और खनिज की कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी को स्मार पत्र सौंपा गया

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जल-जंगल-जमीन और खनिज की कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी को स्मार पत्र सौंपा गया

चांडिल, 13 अगस्त : भूमि अधिकार आंदोलन और विस्थापित मुक्ति वाहिनी (विमुवा) की ओर से बुधवार को चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार राय को एक मांग पत्र सौंपा गया। इसमें जमीन, जल, जंगल और खनिज संसाधनों की कॉर्पोरेट लूट पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

स्मार पत्र सौंपने वालों में नारायण गोप, श्यामल मार्डी, महेंद्र नाथ टुडू, कृष्ण माझी, गणपति, वासुदेव आदित्यदेव, कार्तिक महतो और डोमन बास्के शामिल थे। प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में भूमि अधिग्रहण और विस्थापन के खिलाफ जारी संघर्ष में यह मुद्दा अहम है।

भूमि अधिकार आंदोलन देशभर के जन आंदोलनों और किसान संगठनों का एक साझा मंच है, जिसका गठन उस समय हुआ था जब केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2014 को भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 को निष्क्रिय करने के लिए अध्यादेश जारी किया था। 2015 में इस अध्यादेश के खिलाफ देशव्यापी विरोध और संसद में तीखे प्रतिवाद के चलते सरकार को तीन बार अध्यादेश लाने के बावजूद पीछे हटना पड़ा था।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में अब भी भूमि अधिग्रहण कानून को कमजोर कर दिया गया है और बड़े पैमाने पर खनिज संपदा को कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे प्राकृतिक संसाधनों पर कॉर्पोरेट कब्जा बढ़ रहा है, आदिवासियों पर दमन हो रहा है और नक्सलवाद के नाम पर अत्याचार किए जा रहे हैं।

प्रतिनिधियों ने रघुवर दास सरकार द्वारा बनाए गए लैंड बैंक को तत्काल निरस्त करने और जल्द से जल्द विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग गठित करने की मांग की। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी कि प्राकृतिक संसाधनों और आजीविका के स्रोतों को नष्ट करने या कॉर्पोरेट को सौंपने के किसी भी प्रयास का कड़ा प्रतिवाद किया जाएगा।

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