झामुमो नेता गणेश महाली जमीन विवाद में घिरे, दोनों पक्षों ने पेश किए दस्तावेज, सियासी गरमाहट तेज

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झामुमो नेता गणेश महाली जमीन विवाद में घिरे, दोनों पक्षों ने पेश किए दस्तावेज, सियासी गरमाहट तेज

सरायकेला/आदित्यपुर, 15 जुलाई : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता गणेश महाली एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सालडीह बस्ती रोड स्थित एक जमीन को लेकर सामने आया है, जिस पर दो पक्षों के बीच मालिकाना हक को लेकर तनातनी है। खास बात यह है कि इस विवाद में राजनीतिक दखल और पार्टी बैनर के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

गणेश महाली पर आरोप है कि उन्होंने सालडीह बस्ती में स्थित एक जमीन को झामुमो का झंडा और बैनर लगाकर जबरन कब्जाने की कोशिश की। इस जमीन पर उनका दावा है कि उन्होंने 2023 में श्रीकांत कुंभकार से इसे चेक के माध्यम से खरीदा है। दूसरी ओर, अर्जुन सिंह वालिया और विवेक उपाध्याय का कहना है कि उक्त जमीन पहले से उनके कब्जे में है और 2018 में उन्होंने यह जमीन सुशील लोहार एवं सुनील लोहार से खरीदी थी। होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन अब भी उनके नाम पर है।

गणेश महाली की दलील

महाली ने स्पष्ट किया है कि जमीन वैध तरीके से खरीदी गई है और उनका दावा मजबूत है। उन्होंने श्रीकांत कुंभकार को साथ लेकर आदित्यपुर थाना और अंचल कार्यालय में जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ यह पूरा मामला विपक्ष की साजिश है जो उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना चाहता है।

दूसरे पक्ष का आरोप

अर्जुन सिंह वालिया और विवेक उपाध्याय ने सोमवार देर रात थाना में दस्तावेज जमा कर यह दावा किया कि जमीन पर उनका कब्जा पहले से है। उनका कहना है कि 2020 में भी इस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया था, लेकिन अंचलाधिकारी की जांच में फैसला उनके पक्ष में गया। अब एक बार फिर पार्टी बैनर और बाहुबल के सहारे जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक सरगर्मी और पार्टी की चुप्पी

इस प्रकरण ने झामुमो नेतृत्व को असहज स्थिति में ला दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अब तक इस विवाद पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। हालांकि नाम नहीं छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि उन्हें इस जमीन विवाद में पार्टी कार्यालय खोलने के बहाने बुलाया गया था, लेकिन सच्चाई सामने आने के बाद वे पीछे हट गए। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की पूरी जानकारी आलाकमान को दे दी गई है।

सवालों के घेरे में महाली की भूमिका

अगर जमीन वैध रूप से खरीदी गई थी तो पार्टी बैनर का इस्तेमाल क्यों किया गया? झामुमो जॉइन करते समय ही वहां पार्टी कार्यालय क्यों नहीं खोला गया? यदि होल्डिंग टैक्स और बिजली कनेक्शन उनके नाम पर है तो दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?

सोशल मीडिया पर चेतावनी और मीडिया की नाराजगी

गणेश महाली ने सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक खबर प्रकाशित करने वालों के खिलाफ लीगल एक्शन की चेतावनी दी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किस मीडिया संस्थान पर उनका इशारा था। इस बयान को लेकर पत्रकारों में नाराजगी है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला माना जा रहा है।

गणेश महाली पर लगे आरोपों और उनके जवाबों के बीच सच्चाई क्या है, यह प्रशासनिक जांच का विषय है। लेकिन यह तय है कि यह विवाद झामुमो के लिए विशेषकर शहरी क्षेत्र में राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सबकी निगाहें बुधवार को थाना में होने वाली सुनवाई और पार्टी आलाकमान के रुख पर टिकी हैं।

रिपोर्ट: ManbhumUpdates.com

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