
पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद पिछली बार मां रूपी सोरेन थीं साथ, अब मां के जाने के बाद पहली बार अकेले पहुंचे पारिवारिक रस्म निभाने
चांडिल, 03 नवंबर : झारखंड की राजनीति के बड़े चेहरे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए मंगलवार का दिन राजनीतिक व्यस्तताओं से इतर पारिवारिक और भावनात्मक लिहाज से बेहद खास रहा। एक पारंपरिक पारिवारिक रस्म निभाने के लिए मुख्यमंत्री अपनी धर्मपत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन तथा बड़ी बहन अंजली सोरेन के साथ चांडिल के धातकीडीह स्थित अपने मामा घर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ परिवार के सदस्य और अपने लोग तो थे, लेकिन इस बार माता-पिता का साया उनके साथ नहीं था। यही वजह रही कि वर्षों पुरानी पारिवारिक परंपरा का निर्वहन इस बार कई भावनाओं और यादों से जुड़ गया।
धातकीडीह पहुंचने पर मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मामा गुरुचरण किस्कू, चारु चांद किस्कू सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी उपस्थित थे। विधायक सविता महतो, झामुमो जिलाध्यक्ष डॉ. शुभेंदु महतो समेत अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे।
माता-पिता के निधन के बाद निभाई जाती है यह परंपरा
दरअसल, झारखंडी समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में माता-पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार, श्राद्धकर्म और अस्थि विसर्जन की रस्में पूरी होने पर मामा घर जाकर पारिवारिक परंपरा निभाने की मान्यता है। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने मामा घर पहुंचे थे। यह उनके परिवार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसका निर्वहन उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया।
पहले साथ होते थे दिशोम गुरु और मां रूपी सोरेन
मुख्यमंत्री के इस दौरे को भावुक बनाने वाली सबसे बड़ी वजह उनके माता-पिता की अनुपस्थिति रही। इससे पहले जब भी हेमंत सोरेन अपने मामा घर पहुंचते थे, उनके साथ पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन या मां रूपी सोरेन जरूर होती थीं। पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद जब वे पिछली बार यहां पहुंचे थे, तब मां रूपी सोरेन उनके साथ थीं। लेकिन मां के निधन के बाद यह पहला अवसर था, जब मुख्यमंत्री माता-पिता दोनों के बिना इस पारिवारिक परंपरा को निभाने पहुंचे।
परंपरा वही थी, धातकीडीह का मामा घर भी वही था और परिवार के अपने लोग भी मौजूद थे, लेकिन इस बार उस पारिवारिक मिलन में माता-पिता की कमी का एहसास अलग ही था। जिन माता-पिता के साथ कभी यह पारिवारिक रस्म निभाई जाती थी, आज उनकी यादें ही इस परंपरा की सबसे भावुक कड़ी बन गई हैं।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी स्वयं सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मुस्तैद रहे।
राजनीतिक जीवन में व्यस्त रहने वाले मुख्यमंत्री के लिए यह दौरा किसी सरकारी कार्यक्रम से बढ़कर पारिवारिक परंपरा और रिश्तों से जुड़ा अवसर था। उन्होंने अपने मामा घर पहुंचकर वर्षों पुरानी रस्म का निर्वहन किया, लेकिन इस बार उनके साथ माता-पिता की मौजूदगी नहीं, बल्कि उनकी यादें थीं। रिश्तों की वही आत्मीयता और परंपरा की वही डोर कायम रही, मगर जीवन में माता-पिता की कमी का एहसास इस पारिवारिक अवसर को पहले से कहीं अधिक भावुक बना गया।



