700 सीएफटी बालू लोड, चालान 300-400 सीएफटी का! नीमडीह में छह हाईवा जब्ती के बाद उठे सवाल

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सीओ अभय द्विवेदी के अनुसार, सभी छह हाईवा में निर्धारित मात्रा से अधिक बालू लोड – स्थानीय लोगों ने स्टॉक यार्ड की भूमिका की जांच की उठाई मांग

 

नीमडीह, 25 अक्टूबर : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत आदारडीह स्थित एसएम स्टील कंपनी परिसर से बालू लदे छह हाईवा की जब्ती के बाद अब चालान और बालू की वास्तविक मात्रा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अंचलाधिकारी अभय कुमार द्विवेदी के अनुसार, जब्त किए गए सभी हाईवा में 700-700 सीएफटी बालू लोड है, जबकि कार्रवाई के बाद संबंधित वाहनों के लिए 300 और 400 सीएफटी के चालान दर्शाए जाने की बात सामने आ रही है। इस मामले में स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का दावा है कि मामले को मैनेज करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन चर्चाओं और चालान की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि रविवार सुबह को गुप्त सूचना के आधार पर अंचलाधिकारी अभय द्विवेदी ने आदारडीह स्थित एसएम स्टील कंपनी परिसर में कार्रवाई करते हुए बालू लदे छह हाईवा जब्त किए थे। बताया जा रहा है कि इन वाहनों के जरिए तिरुलडीह क्षेत्र से बालू लाकर कंपनी परिसर में आपूर्ति की जा रही थी। कार्रवाई के बाद वाहनों के पास मौजूद चालान और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई।

700 सीएफटी बालू के बदले 300-400 सीएफटी का चालान कैसे?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बालू की वास्तविक मात्रा और चालान में दर्ज मात्रा के बीच कथित अंतर को लेकर उठ रहा है। यदि हाईवा में 700 सीएफटी बालू लोड था, तो उसके परिवहन के लिए 300 या 400 सीएफटी का चालान किस आधार पर निर्गत किया गया? क्या स्टॉक यार्ड से बालू की आपूर्ति करते समय ही कम मात्रा का चालान जारी किया गया था या वाहनों के पकड़े जाने के बाद चालान से संबंधित कोई प्रक्रिया अपनाई गई? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही मिल सकेगा।

स्टॉक यार्ड की भूमिका की जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने संबंधित बालू स्टॉक यार्ड की भी जांच कराने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि स्टॉक यार्ड से बालू की कितनी मात्रा निकाली गई, चालान में कितनी मात्रा दर्ज की गई और वाहनों पर वास्तविक रूप से कितना बालू लोड था। यदि वास्तविक मात्रा और चालान में अंतर पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि बालू स्टॉक यार्ड संचालक और हाईवा मालिकों के बीच किसी तरह की सहमति से कम मात्रा का चालान जारी किया गया था या नहीं। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में किसी की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है।

राजस्व के नुकसान की आशंका, जांच पर टिकी निगाहें

बालू के वैध कारोबार में भी यदि वास्तविक मात्रा से कम का चालान जारी किया जाता है, तो इससे राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व पर असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है। जांच के दौरान बालू के स्रोत, स्टॉक यार्ड के रिकॉर्ड, चालान जारी होने के समय और उसमें दर्ज मात्रा का मिलान महत्वपूर्ण होगा।

सीओ अभय द्विवेदी की कार्रवाई के बाद अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन जब्त किए गए छह हाईवा के दस्तावेजों के सत्यापन के साथ संबंधित स्टॉक यार्ड की भूमिका की भी जांच करता है या नहीं। जांच के निष्कर्ष ही स्पष्ट करेंगे कि मामला केवल परिवहन संबंधी अनियमितता का है या इसमें राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली किसी बड़ी गड़बड़ी की भी भूमिका है।

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