
गांव के मुखिया ही नहीं, लोगों के सुख-दुख के साथी थे नयन सिंह मुंडा; स्वर्णरेखा तट पर पंचतत्व में विलीन हुआ पार्थिव शरीर
ईचागढ़, 20 अक्टूबर : किसी के लिए वे मुखिया थे, तो किसी के लिए गांव के अभिभावक। किसी के लिए वे ग्राम प्रधान थे, तो किसी के लिए हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले अपने। सोड़ो पंचायत के मुखिया एवं ग्राम प्रधान नयन सिंह मुंडा के निधन ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। मंगलवार को जब हजारों ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी, तो माहौल गमगीन हो उठा। स्वर्णरेखा नदी के तट पर उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनकी यादें ग्रामीणों के दिलों में रह गईं।
सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत सोड़ो पंचायत के मुखिया नयन सिंह मुंडा ने सोमवार को ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही सोड़ो पंचायत सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार देर रात उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव सोड़ो लाया गया। मंगलवार सुबह होते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। जनप्रतिनिधियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अपने प्रिय जनप्रतिनिधि को अंतिम विदाई देने के लिए गांव का रुख किया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
नयन सिंह मुंडा के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। रांची के पूर्व सांसद सुबोध कांत सहाय, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, उपाध्यक्ष मधुश्री महतो और भाजपा नेता हरेलाल महतो समेत कई जनप्रतिनिधियों ने सोड़ो गांव पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और दुख की इस घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाया।
मंगलवार दोपहर स्वर्णरेखा नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान हजारों ग्रामीण मौजूद रहे। अपने मुखिया को अंतिम विदाई देते समय लोगों की आंखें नम थीं। एक ऐसा व्यक्ति, जो वर्षों तक गांव की जिम्मेदारियां निभाता रहा, अब उनके बीच नहीं था।
पंचायत की जिम्मेदारी से जुड़ा रहा जीवन
नयन सिंह मुंडा का सामाजिक और राजनीतिक जीवन पंचायत की सेवा से जुड़ा रहा। वर्ष 2010 में झारखंड में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वे पहली बार सोड़ो पंचायत के मुखिया निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने दोबारा मुखिया पद की जिम्मेदारी संभाली। मुखिया के साथ-साथ वे सोड़ो गांव के ग्राम प्रधान के रूप में भी कार्यरत थे।
उनकी पत्नी सुभाषिणी देवी भी क्षेत्र की राजनीति और जनसेवा में सक्रिय रही हैं। वे वर्ष 2015 में सोड़ो पंचायत की मुखिया निर्वाचित हुई थीं। वर्तमान में वे ईचागढ़ क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य हैं। इस तरह परिवार लंबे समय से पंचायत और जनसेवा से जुड़ा रहा है।
यादों में रहेंगे गांव के अभिभावक
ग्रामीणों के अनुसार, नयन सिंह मुंडा मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। वे आम लोगों की समस्याएं सुनते थे और उनके समाधान के लिए प्रयासरत रहते थे। पंचायत के विकास और जनहित से जुड़े कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
उनके निधन से सोड़ो पंचायत ने केवल एक जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि गांव की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर उठाने वाला एक परिचित चेहरा खो दिया है। मंगलवार को स्वर्णरेखा के तट पर दी गई अंतिम विदाई इस बात की गवाह बनी कि नयन सिंह मुंडा का ग्रामीणों के जीवन में खास स्थान था। उनका जाना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, वहीं क्षेत्र के लोग भी उनकी कमी लंबे समय तक महसूस करेंगे।