कामरेड सुचांद महतो की छठी पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि, किसान-मजदूरों के संघर्ष को तेज करने का आह्वान
नीमडीह, 26 अगस्त : सरायकेला खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत रघुनाथपुर में बुधवार को झारखंड राज्य किसान सभा एवं माकपा के तत्वावधान में किसान नेता – कामरेड सुचांद महतो की छठी स्मृति दिवस श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर किसान, मजदूर, छात्र और युवाओं के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।
सभा को संबोधित करते हुए माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य सह झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुफल महतो ने कहा कि सुचांद महतो अंधविश्वास, डायन प्रथा, शोषण, जुल्म, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ अथक योद्धा थे। उन्होंने किसान, मजदूर, छात्र और युवाओं के अधिकारों को लेकर लगातार संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान सरायकेला-खरसावां जिले में किसान आंदोलन को मजबूत करने में सुचांद महतो की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। चांडिल विस्थापन, तिरुलडीह गोलीकांड और जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों को हमेशा याद रखा जाएगा।
सुफल महतो ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय किसानों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि 10 अगस्त के देशव्यापी जेल भरो आंदोलन में लाखों किसानों ने भाग लिया और आगामी 26 नवंबर को देशभर में बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
माकपा के पूर्व जिला सचिव मनींद्र गोप ने कहा कि सुचांद महतो लोकतंत्र, संविधान और सांप्रदायिक सद्भाव के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने कहा कि उनके विचार आज भी किसान और मजदूर आंदोलनों के लिए प्रेरणा का काम करते हैं।
कार्यक्रम में माकपा जिला सचिव सुरेंद्र नाथ महतो, किसान सभा के जिला सचिव हरे कृष्ण महतो, शिवप्रसाद पांडेय, कमल पारित, सतयरंजन कोटका, तारापदो रवानी, किसान नेता नीलकांत सिंह मुंडा, यमुना देवी, प्रबोध महतो, शक्तिपदो मंडल, उमापदो महतो, रामाशंकर गोप, निशिकांत महतो, परशुराम सिंह मुंडा, गुणाधर कैवर्त, राजेश महतो, चिंतामणि महतो, बैद्यनाथ महतो, महेंद्र महतो, कृष्ण दास महतो, अनिल माहली, भासंती महतो, लक्ष्मी महतो, सरस्वती महतो और निशा महतो समेत अन्य लोग मौजूद थे।
वक्ताओं ने कहा कि सुचांद महतो के संघर्ष और विचारों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस दौरान किसान-मजदूरों के अधिकार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया।



