जमीन विवाद ने लिया उग्र रूप, पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल – ग्रामीणों ने कहा—फैसला होने तक नहीं छोड़ेंगे बंधक
सरायकेला, 24 अगस्त : सरायकेला खरसावां जिले के कांड्रा थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती हुदू पंचायत के ऊपरबेड़ा गांव में जमीन विवाद ने सोमवार को उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब एक ही परिवार के चार सदस्यों को तुमसा सरकारी स्कूल में कथित रूप से बंधक बनाकर मारपीट किए जाने की सूचना सामने आई। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद एक पत्रकार को भी घेर लिया और कथित तौर पर स्पष्ट कर दिया कि स्थानीय स्तर पर फैसला होने तक बंधकों को नहीं छोड़ा जाएगा।
बंधक बनाए गए लोगों में भृगु राम सरदार, जटल सरदार, हबलू सरदार और करुणा सरदारिन के नाम सामने आए हैं। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविकता और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
जमीन विवाद से शुरू हुआ विवाद, कई गंभीर आरोप
ग्रामीणों के चंगुल से निकलकर बाहर आए कार्तिक सरदार ने आरोप लगाया कि जमीन पर कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को लेकर उसके परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया गया। कार्तिक ने घर और मंदिरों में तोड़फोड़ किए जाने तथा उसकी बहन के साथ छेड़खानी का भी आरोप लगाया है।
उसने स्थानीय मुखिया समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
रविवार को सूचना, सोमवार को पहुंची पुलिस
जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सरदार का आरोप है कि घटना की जानकारी रविवार को ही कांड्रा पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन पुलिस तत्काल मौके पर नहीं पहुंची। सोमवार को एसपी मनोज स्वर्गीयारी के निर्देश के बाद कांड्रा थाना प्रभारी विनोद मुर्मू पुलिस बल के साथ ऊपरबेड़ा पहुंचे।
पुलिस के साथ इंडिया न्यूज वायरल बिहार-झारखंड के पत्रकार विपिन वार्ष्णेय भी मौजूद थे। आरोप है कि पुलिस टीम के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने उन्हें भी घेर लिया। स्थिति को देखते हुए पुलिस को अतिरिक्त बल की आवश्यकता महसूस हुई। एसपी की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल भेजे जाने की बात कही गई है।
कानून हाथ में लेने की कोशिश या स्थानीय विवाद का उग्र रूप?
ऊपरबेड़ा की घटना ने ग्रामीण स्तर पर जमीन विवादों के निपटारे और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि चार लोगों को वास्तव में बंधक बनाकर रखा गया है तो यह गंभीर मामला है। वहीं, दूसरी ओर परिवार की ओर से लगाए गए मारपीट, तोड़फोड़ और छेड़खानी के आरोप भी जांच का विषय हैं।
सबसे अहम सवाल यह है कि जमीन विवाद के समाधान के नाम पर किसी व्यक्ति या समूह को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार कैसे मिल सकता है। पुलिस के गांव पहुंचने के बाद भी यदि बंधकों को छोड़ने से इनकार किया गया है, तो प्रशासन के सामने बंधकों की सुरक्षित रिहाई के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की चुनौती है।
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई भी जांच के घेरे में
घटना को लेकर पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिला परिषद सदस्य का दावा है कि रविवार को सूचना मिलने के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में यह जांच का विषय है कि पुलिस को सूचना कब मिली, सूचना की प्रकृति क्या थी और मौके पर पुलिस क्यों नहीं पहुंची।
कांड्रा थाना क्षेत्र में पूर्व में राहुल हांसदा और तपन प्रधान की हत्या के मामलों में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर उठे सवालों की पृष्ठभूमि में ऊपरबेड़ा की घटना ने पुलिस की सक्रियता पर फिर चर्चा छेड़ दी है।
फिलहाल पूरे गांव की निगाह पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है। सबसे बड़ी चुनौती चारों कथित बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालना और घटना के पीछे जमीन विवाद की वास्तविक वजह सामने लाना है। इसके साथ ही पुलिस के सामने यह भी सवाल है कि यदि किसी पक्ष ने कानून हाथ में लेकर लोगों को बंधक बनाया है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।


