महिलाओं से जुड़े मामलों पर विधायक और जिप सदस्य की चुप्पी से बढ़ रहा असंतोष, स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
चांडिल, 20 जून : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं से जुड़े दो चर्चित मामलों के बाद स्थानीय लोगों के बीच जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि जब महिलाओं और आदिवासी समाज से जुड़े संवेदनशील मामलों पर पूरे जिले में बहस चल रही है, तब क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला विधायक और महिला जिला परिषद सदस्य की सार्वजनिक चुप्पी निराशाजनक है।
ज्ञात हो कि 12 जून को चांडिल थाना क्षेत्र के रुचाप गांव में एक पुलिसकर्मी पर आदिवासी महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगा था। वहीं 16 जून को कपाली पुलिस पर कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी की एक आदिवासी युवती के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया। दोनों घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली और आदिवासी संगठनों ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में क्षेत्र की विधायक सविता महतो और जिला परिषद सदस्य पिंकी लायक को पीड़ित पक्ष का हाल जानने, निष्पक्ष जांच की मांग करने तथा जनभावनाओं को सामने रखने के लिए सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखनी चाहिए थी। लोगों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनता के बीच सक्रिय रहने वाले जनप्रतिनिधि अब संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कई ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि महिलाओं से जुड़े मामलों पर भी महिला जनप्रतिनिधि मुखर नहीं होंगी, तो आम लोगों की अपेक्षाएं किससे रहेंगी। लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब पूरा क्षेत्र इन घटनाओं को लेकर चर्चा कर रहा है, तब जनप्रतिनिधियों की ओर से एक संवेदनशील बयान तक सामने क्यों नहीं आया।
हालांकि दोनों मामलों की जांच अभी जारी है और आरोपित पुलिसकर्मियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषी या निर्दोष घोषित नहीं किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है तथा जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
वहीं दूसरी ओर जिले की पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी की कार्यशैली की स्थानीय लोग सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि दोनों मामलों को उन्होंने गंभीरता से लिया, त्वरित संज्ञान लिया और संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की। साथ ही मामलों की जांच पर लगातार निगरानी भी रखी जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक स्तर पर जो तत्परता दिखाई गई, उसी प्रकार जनप्रतिनिधियों से भी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा थी।
फिलहाल क्षेत्र में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि महिलाओं और आदिवासी समाज से जुड़े मामलों पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस का विषय भी बन सकता है।