जनगणना के दौरान जाति दर्ज करने को लेकर विवाद, ईचागढ़ के नवाडीह में ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
ईचागढ़, 1 जून : देशभर में चल रही जनगणना 2026 की प्रक्रिया के तहत झारखंड में भी बूथ स्तर पदाधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर आंकड़े संग्रहित किए जा रहे हैं। इसी बीच सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत देवलटांड पंचायत के नवाडीह गांव में जनगणना के दौरान जाति दर्ज करने को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने जनगणना प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए अपनी मांग अधिकारियों के समक्ष रखी है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार को नवाडीह गांव में जनगणना कार्य के दौरान ग्रामीणों ने जाति संबंधी कॉलम में संताल (अनुसूचित जनजाति) दर्ज करने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि जनगणना कर रहे BLO ने इसके लिए जाति प्रमाण पत्र की मांग की और कहा कि प्रमाण पत्र उपलब्ध होने पर ही संबंधित श्रेणी दर्ज की जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने BLO को अपने पुराने खतियान दिखाए, जिनमें “संताल” एवं “मांझी” दर्ज है। इसके बावजूद खतियान को पर्याप्त आधार नहीं माना गया और जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया। इसी बात को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई और जनगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद ईचागढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), प्रखंड प्रमुख, देवलटांड़ पंचायत के मुखिया सहित अन्य प्रखंड स्तरीय अधिकारी एवं कर्मी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनीं और स्थिति को समझने का प्रयास किया।
बैठक के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी ने ग्रामीणों से जनगणना कार्य में सहयोग करने की अपील की। साथ ही जाति संबंधी कॉलम को लेकर उत्पन्न विवाद के संबंध में उन्होंने ग्रामीणों को अपनी आपत्ति एवं शिकायत वरीय अधिकारियों तक पहुंचाने की सलाह दी। अधिकारियों ने जनगणना कार्य को बाधित नहीं करने और प्रक्रिया जारी रखने का अनुरोध भी किया।
ग्रामीणों ने इस संबंध में एक संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन तैयार किया है, जिसे वे संबंधित अधिकारियों को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि जनगणना में उनकी जाति “संताल” दर्ज की जाए, क्योंकि उनके अनुसार यह उनके खतियान में दर्ज है।
ग्रामीणों का दावा है कि देवलटांड़ पंचायत के नवाडीह, देवलटांड़, आगसिया और रुगड़ी गांवों में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं, जिनके भूमि अभिलेखों (खतियान) में “संताल-मांझी” अंकित है। ग्रामीणों के अनुसार, इनमें से कई लोगों को अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र भी जारी किया जा चुका है तथा अनेक लोग अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जब प्रखंड विकास पदाधिकारी से मामले की वास्तविक स्थिति और प्रशासनिक पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने इस विषय पर कोई बयान देने से इनकार कर दिया।
कुल मिलाकर प्रखंड विकास पदाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है।
फिलहाल गांव में जनगणना कार्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने अपनी मांगों के समर्थन में उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि प्रशासन जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से जारी रखने पर जोर दे रहा है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस विवाद पर क्या स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करता है और ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।
विवाद उत्पन्न होने के बाद नावाडीह गांव में पंचायत के ग्रामीण इकट्ठा हुए और बैठक की। ग्रामीणों ने बताया कि जब तक इस मामले का निष्पादन नहीं हो जाता है तब तक वे जनगणना करने के पक्ष में नहीं होंगे।