तिरुलडीह में जंगली हाथियों का कहर जारी, घर तोड़े, फसल रौंदी — वन विभाग की लापरवाही पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
कुकडू, 14 अप्रैल : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र अंतर्गत तिरुलडीह थाना क्षेत्र इन दिनों जंगली हाथी के लगातार हमलों से लोग दहशत में है। हाथियों का झुंड पिछले कई वर्षों से इलाके में सक्रिय है और आए दिन गांवों में घुसकर भारी नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार की रात करीब सात हाथियों का झुंड डाटम गांव में घुस आया और जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने गांव निवासी मिहिर महतो के घर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। घर में रखा अनाज भी चट कर गए, जिससे परिवार के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और प्रभावित परिवार रातभर भय के साए में जागते रहे। ग्रामीणों के अनुसार, यही झुंड लगातार अन्य गांवों को भी निशाना बना रहा है। चौड़ा गांव के टोला गोंगाडीह में हाथियों ने जगन्नाथ सिंह मुंडा का घर तोड़ दिया और उसमें रखे धान व आलू को पूरी तरह नष्ट कर दिया। वहीं कर्ण सिंह मुंडा और विश्वजीत सिंह मुंडा की खेतों में लगी लौकी की फसल को भी रौंदकर बर्बाद कर दिया गया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि अब मानव-हाथी संघर्ष इस क्षेत्र में आम हो गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग के अधिकारी मौके पर समय पर नहीं पहुंचते और न ही हाथियों को खदेड़ने के लिए कोई ठोस या प्रभावी कार्रवाई की जाती है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में शनिवार सुबह कुकडू प्रखंड के सापारूम गांव में हाथी के हमले में 55 वर्षीय राधा तांती की मौत हो गई थी। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा कोई सतर्कता या सुरक्षा उपाय नहीं बढ़ाया गया, जिससे लोगों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में जनहानि और भी बढ़ सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी, त्वरित राहत एवं मुआवजा, तथा हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। फिलहाल, तिरुलडीह थाना क्षेत्र के गांवों में लोग हर रात भय के साए में गुजारने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग की निष्क्रियता इस संकट को और गहरा बना रही है।