PM-USHA कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की अनदेखी! केंद्रीय मंत्री को न्योता नहीं, चांडिल के सिंहभूम कॉलेज प्रशासन पर गंभीर सवाल

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PM-USHA कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की अनदेखी! केंद्रीय मंत्री को न्योता नहीं, चांडिल के सिंहभूम कॉलेज प्रशासन पर गंभीर सवाल

चांडिल | मानभूम अपडेट्स, 12 अप्रैल

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत चांडिल स्थित सिंहभूम कॉलेज में दो मंजिला भवन के उद्घाटन समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी सरायकेला-खरसावां के जिला अध्यक्ष हरे कृष्णा प्रधान ने कार्यक्रम में कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर कॉलेज प्रशासन, कोल्हान यूनिवर्सिटी और PM-USHA के अधिकारियों पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रांची लोकसभा के सांसद सह केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया, जो न सिर्फ प्रोटोकॉल का उल्लंघन है बल्कि एक केंद्रीय मंत्री का सीधा अपमान भी है।
हरे कृष्णा प्रधान ने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र प्रायोजित योजना के तहत आयोजित किया गया था, इसके बावजूद मंच पर लगाए गए पोस्टर में न तो प्रधानमंत्री का फोटो था और न ही स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री का नाम। उन्होंने इसे बेहद गंभीर चूक बताते हुए कहा कि यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदार संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने आगे कहा कि झारखंड सरकार के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी केंद्रीय प्रायोजित योजना के उद्घाटन या शिलान्यास कार्यक्रम में संबंधित केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद को आमंत्रित करना अनिवार्य होता है। साथ ही मंच के पोस्टर पर प्रधानमंत्री की तस्वीर और संबंधित जनप्रतिनिधियों का नाम प्रमुखता से होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
मामले को और गंभीर बनाते हुए उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब 2023 से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का नाम बदलकर PM-USHA कर दिया गया है, तो फिर कार्यक्रम के पोस्टर में पुराने नाम का उपयोग क्यों किया गया। इसे उन्होंने प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता का उदाहरण बताया।
भाजपा जिला अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा कि सिंहभूम कॉलेज प्रशासन, कोल्हान यूनिवर्सिटी और PM-USHA के अधिकारियों की यह चूक अस्वीकार्य है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समक्ष उठाया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
एक ओर जहां केंद्र सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश और योजनाओं के जरिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इस तरह की लापरवाही न सिर्फ योजनाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि सरकारी प्रोटोकॉल की भी खुली अवहेलना करती है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में प्रशासन जवाबदेही तय करता है या फिर यह मुद्दा भी अन्य विवादों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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