लद्दाख की न्यायपूर्ण मांगों के समर्थन में झारखंडी समाज का प्रदर्शन — सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को बताया लोकतंत्र और पर्यावरण पर हमला

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लद्दाख की न्यायपूर्ण मांगों के समर्थन में झारखंडी समाज का प्रदर्शन — सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को बताया लोकतंत्र और पर्यावरण पर हमला

जमशेदपुर, 06 अक्टूबर : लद्दाख के पर्यावरणविद्, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के झारखंडी समाज ने जमशेदपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। समाज के विभिन्न सामाजिक, जनजातीय और पारंपरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त, जमशेदपुर को ज्ञापन सौंपकर गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की और लद्दाख की न्यायपूर्ण मांगों — छठी अनुसूची, राज्य का दर्जा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार — का समर्थन किया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सोनम वांगचुक वह नाम हैं जिन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण, सौर ऊर्जा और स्थानीय शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दी। उनका “आईस स्टूपा प्रोजेक्ट” आज वैश्विक स्तर पर सतत पर्यावरण संरक्षण की मिसाल माना जाता है। ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी को उन्होंने लोकतंत्र और पर्यावरण दोनों पर हमला बताया।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार देशभर में शांतिपूर्ण आंदोलनों को कुचलने की परंपरा बना चुकी है। जो भी जनता के अधिकारों, पर्यावरण या संविधान की रक्षा की बात करता है, उसे देशविरोधी करार देकर जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लद्दाख की आवाज को दबाना, दरअसल पूरे भारत के जनसंघर्षों की आवाज को कुचलने की कोशिश है।

प्रदर्शकारियों की प्रमुख मांगें:

सोनम वांगचुक व अन्य प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई। लद्दाख को छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा प्रदान किया जाए। बेरोजगार युवाओं के लिए स्थायी रोजगार सुनिश्चित किए जाएं। लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर न्यायपूर्ण समाधान निकाला जाए।

झारखंडी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जैसे झारखंड अपने अस्तित्व और पहचान के लिए लंबे संघर्ष के बाद राज्य बना, वैसे ही लद्दाख की लड़ाई भी पहचान, पर्यावरण और आत्मसम्मान की लड़ाई है। अंत में, वक्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर लोकतंत्र की आवाज को इस तरह दबाया गया तो देशभर के नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

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