
सात मौजा के जमीनदाताओं ने उठाया नियोजन का मुद्दा, सूची सौंपकर रोजगार की मांग करेगा संघ; मांग पूरी नहीं हुई तो निर्माण कार्य के खिलाफ होगा आंदोलन
नीमडीह, 2 नवंबर : विकास और रोजगार की उम्मीद में अपनी उपजाऊ जमीन देने वाले नीमडीह के सात मौजा के ग्रामीण अब नियोजन के लिए कंपनी प्रबंधन का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। एसएम स्टील प्लांट की स्थापना के लिए करीब 12 सौ एकड़ जमीन देने वाले 15 सौ से अधिक जमीनदाताओं के रोजगार का मुद्दा अब तूल पकड़ने लगा है। जमीन अधिग्रहण के समय स्थानीय लोगों को रोजगार समेत विभिन्न लाभों का भरोसा दिया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट के निर्माण कार्य में ही स्थानीय जमीनदाताओं की उपेक्षा कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को आदरडीह स्थित सामुदायिक भवन में सप्तग्राम विकास संघ की बैठक हुई। बैठक में जमीनदाताओं के नियोजन की स्थिति पर चिंता जताते हुए स्थानीय बेरोजगारों की सूची तैयार कर कंपनी प्रबंधन को सौंपने का निर्णय लिया गया। इसके बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने कंपनी प्रबंधन से मुलाकात कर जमीनदाताओं को जल्द रोजगार से जोड़ने का आग्रह किया।
संघ के अध्यक्ष जयंत कुमार रजक ने कहा कि कंपनी के लिए जमीन लेते समय स्थानीय लोगों को कई तरह के सपने दिखाए गए थे। आज जब प्लांट का निर्माण हो रहा है, तब उन्हीं जमीनदाताओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि विकास की कीमत स्थानीय लोगों को रोजगार से वंचित करना है, तो ऐसा विकास स्वीकार नहीं है। जमीन नीमडीह के लोगों ने दी है, इसलिए रोजगार में भी पहला अधिकार यहीं के लोगों का होना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि कंपनी प्रबंधन ने जल्द स्थानीय जमीनदाताओं को रोजगार से जोड़ने की पहल नहीं की, तो सप्तग्राम विकास संघ आंदोलन का रास्ता अपनाते हुए प्लांट के निर्माण कार्य के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगा। फिलहाल जमीनदाताओं की निगाहें कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।



