नीमडीह : एसएम स्टील प्लांट फिर विवादों में, अब स्थानीय लोगों ने उठाई 100% रोजगार की मांग – सुखराम हेम्ब्रम की भूमिका पर उठ रहे सवाल

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नीमडीह : एसएम स्टील प्लांट फिर विवादों में, अब स्थानीय लोगों ने उठाई 100% रोजगार की मांग – सुखराम हेम्ब्रम की भूमिका पर उठ रहे सवाल

नीमडीह, 19 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह अंचल में सैकड़ों एकड़ भूमि पर प्रस्तावित एसएम स्टील प्लांट एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। जहां एक ओर प्लांट स्थापना का कार्य तेज गति से शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय रैयतों और ग्रामीणों ने जमीन दाताओं एवं स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। इस बीच सुखराम हेम्ब्रम की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीन वर्ष पहले जब प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तभी से पूरा मामला विवादों में रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान कई जगह नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि कई रैयतों को उनकी जमीन का उचित लाभ नहीं मिला, जबकि बिचौलियों ने सबसे अधिक फायदा उठाया। ग्रामीणों का कहना है कि “माल महाराज का और मिर्जा खेले होली” वाली कहावत इस पूरे प्रकरण में चरितार्थ होती दिखी।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में खतियान में दर्ज सभी हिस्सेदारों की सहमति लिए बिना केवल एक-दो लोगों की सहमति के आधार पर पूरी जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया। ऐसे मामलों को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं।

अब जबकि प्लांट निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है, स्थानीय लोगों की मांग है कि जमीन देने वाले रैयतों और आसपास के युवाओं को रोजगार में शत-प्रतिशत प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि प्लांट निर्माण से लेकर संचालन तक मिस्त्री, मजदूर, ठेका कार्य, मटेरियल सप्लाई, सुरक्षा, परिवहन तथा जेसीबी, ट्रक, ट्रैक्टर समेत अन्य मशीनों और वाहनों की आपूर्ति में स्थानीय लोगों को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी उपजाऊ कृषि भूमि हमेशा के लिए उद्योग के लिए दी है, इसलिए उस उद्योग से रोजगार प्राप्त करना उनका अधिकार भी है और औद्योगिक परियोजनाओं में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की सरकारी नीति भी यही कहती है।

इधर, पिछले कुछ दिनों से विभिन्न गांवों में लगातार बैठकें आयोजित कर ग्रामीण एसएम स्टील प्रबंधन से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच सुखराम हेम्ब्रम का नाम भी चर्चाओं में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान रैयतों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर कंपनी को सैकड़ों एकड़ जमीन उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। ग्रामीणों का दावा है कि जब कुछ लोगों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था, तब उन्हें मनाने, ग्रामसभा आयोजित कराने तथा ग्राम प्रधानों से सहमति दिलाने में भी सुखराम हेम्ब्रम सक्रिय रहे।

अब रोजगार के मुद्दे पर भी ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जब भी स्थानीय लोग कंपनी प्रबंधन से रोजगार की मांग करते हैं, तब सुखराम हेम्ब्रम हस्तक्षेप करते हैं और ग्रामीणों को आपस में विभाजित करने का प्रयास करते हैं। हाल ही में एक बैठक के दौरान उनके द्वारा दिया गया कथित सार्वजनिक भाषण भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच स्थानीय लोगों ने एसएम स्टील प्रबंधन से स्पष्ट करने की मांग की है कि सुखराम हेम्ब्रम की कंपनी में क्या भूमिका है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या वह कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि हैं या किसी अन्य हैसियत से कंपनी और ग्रामीणों के बीच हस्तक्षेप कर रहे हैं।

फिलहाल, रोजगार और स्थानीय भागीदारी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एसएम स्टील प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब लोगों की निगाहें कंपनी के अगले कदम और प्रशासन के रुख पर टिकी हैं।

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