साम्राज्यवाद बनाम राष्ट्रवाद पर तीखा विमर्श, ‘रेड बुक्स डे’ पर गूंजी जनवादी चेतना

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साम्राज्यवाद बनाम राष्ट्रवाद पर तीखा विमर्श, ‘रेड बुक्स डे’ पर गूंजी जनवादी चेतना


जमशेदपुर, 21 फ़रवरी : जनवादी लेखक संघ पूर्वी सिंहभूम इकाई की ओर से आज गोलमुरी स्थित भोजपुरी भवन में ‘रेड बुक्स डे’ एवं अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का केंद्रीय विषय “साम्राज्यवाद बनाम राष्ट्रवाद” रहा, जिस पर वक्ताओं ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य के संदर्भ में गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत काशीनाथ प्रजापति ने प्रेरणादायक गीत “तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर…” से की। विषय प्रवेश कराते हुए सचिव वरुण प्रभात ने कहा कि साम्राज्यवाद बनाम राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि हमारे समय का नैतिक प्रश्न है। उन्होंने वैश्विक पूंजी और सांस्कृतिक वर्चस्व के बरक्स समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व आधारित जनवादी राष्ट्रवाद की आवश्यकता पर बल दिया।
सीयाशरण शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रवाद का स्वरूप लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर कहीं न कहीं साम्राज्यवादी हितों को साध रहा है। डॉ. राम कविन्द्र ने फिलिस्तीन, वेनेजुएला और यूक्रेन जैसे उदाहरणों के माध्यम से साम्राज्यवाद की विस्तारवादी प्रवृत्ति को रेखांकित किया। शशि कुमार ने अमेरिका के नेतृत्व में वैश्विक संसाधनों की लूट की आलोचना करते हुए जनतांत्रिक शक्तियों से एकजुट होने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता डॉ. सुभाष चंद्र गुप्त ने कहा कि 21वीं सदी में भी यातना शिविरों और दमनकारी नीतियों की मौजूदगी नाजीवाद और फासीवाद के बदले रूप की ओर संकेत करती है। अध्यक्ष अशोक शुभदर्शी ने चेतना के विकास को समाजवादी निर्माण की बुनियाद बताया।
लिटिल इप्टा के बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति और फैज की रचना “हम देखेंगे” के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। संचालन सतीश कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन देवाशीष मुखर्जी ने दिया।

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