झारखंड आंदोलन के एक सक्रिय सिपाही का निधन, दुबराज कुंभकार की विदाई से बोड़ाम में शोक

MANBHUM UPDATES
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पटमदा, 02 सितंबर : झारखंड आंदोलन के दौर में लंबे समय तक जुड़े रहे आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता दुबराज कुंभकार का मंगलवार, 01 सितंबर को आकस्मिक निधन हो गया। 65 वर्षीय दुबराज कुंभकार ने हार्ट अटैक के बाद अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही करीब दोपहर 12:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही बड़ा सुसनी सहित बोड़ाम क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

दुबराज कुंभकार का जीवन झारखंड आंदोलन और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा। छात्र जीवन से ही वे अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चलाए गए आंदोलन में सक्रिय हो गए थे। आंदोलन के दौर में शहीद निर्मल महतो के विचारों और नेतृत्व से प्रभावित होकर उन्होंने झारखंड आंदोलन को मजबूती देने में अपनी भूमिका निभाई।

झारखंड अलग राज्य के आंदोलन के दौरान दुबराज कुंभकार ने क्षेत्र के लोगों के बीच जागरूकता फैलाने और आंदोलन से जोड़ने का काम किया। आंदोलन के बाद भी उन्होंने सामाजिक गतिविधियों से अपना जुड़ाव बनाए रखा। ग्रामीणों की समस्याओं को समझना, लोगों को उचित मार्गदर्शन देना और सामाजिक मामलों में सक्रिय भागीदारी उनकी पहचान बनी रही।

स्थानीय लोगों के अनुसार, उनका स्वभाव सरल, मृदुभाषी और मिलनसार था। यही कारण रहा कि राजनीतिक और सामाजिक विचारों में भिन्नता के बावजूद क्षेत्र के विभिन्न वर्गों के लोग उनका सम्मान करते थे।

पीछे छोड़ गए पत्नी और दो पुत्र

दुबराज कुंभकार अपने पीछे पत्नी और दो पुत्र अशोक कुंभकार एवं दीपक कुंभकार सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके आकस्मिक निधन से परिजनों के साथ-साथ झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों और स्थानीय ग्रामीणों में गहरा दुख है।

उनके निधन पर सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि दुबराज कुंभकार का जीवन झारखंड आंदोलन की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने अलग राज्य के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। लोगों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई।

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