20 लाख रुपये की मांग पर Manbhum Updates का कानूनी पलटवार, खनन पदाधिकारी के नोटिस को बताया निराधार – नोटिस वापस लेने की मांग

MANBHUM UPDATES
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20 लाख रुपये की मांग पर Manbhum Updates का कानूनी पलटवार, खनन पदाधिकारी के नोटिस को बताया निराधार – नोटिस वापस लेने की मांग

चांडिल/सरायकेला, 10 जून : सरायकेला-खरसावां के जिला खनन पदाधिकारी ज्योति शंकर सतपथी द्वारा Manbhum Updates को भेजे गए विधिक नोटिस के खिलाफ समाचार पोर्टल ने झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रेम मार्डी के माध्यम से विस्तृत कानूनी जवाब भेजते हुए नोटिस के प्रत्येक आरोप का बिंदुवार प्रतिवाद किया है। जवाब में न केवल 20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मांग पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि पूरे नोटिस को निराधार, मनमाना एवं विधिसम्मत आधार से रहित बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग भी की गई है। Manbhum Updates ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी पत्रकारिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा जनसरोकार के मुद्दों पर रिपोर्टिंग के अधिकार से पीछे हटने वाला नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।
अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए जवाब में सबसे पहले नोटिस में वर्णित सभी तथ्यों, आरोपों एवं संकेतों का खंडन किया गया है, सिवाय उन तथ्यों के जिन्हें उत्तर में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। जवाब में कहा गया है कि जिला खनन पदाधिकारी एक लोक सेवक होते हुए भी बिना किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लेख किए Manbhum Updates से 20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि एक सरकारी पदाधिकारी विभाग की ओर से यह निर्धारित नहीं कर सकते कि कौन-सी सामग्री मानहानिकारक है।
Manbhum Updates ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि वह किसी प्रकार की सार्वजनिक क्षमा-याचना करने अथवा नोटिस के आधार पर किसी सामग्री को हटाने के लिए बाध्य नहीं है। जवाब में यह भी कहा गया है कि 20 लाख रुपये की मांग रिश्वतखोरी एवं पद के दुरुपयोग का एक आपराधिक कृत्य प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य निजी लाभ प्राप्त करना हो सकता है।
जवाब में कहा गया है कि Manbhum Updates एक समाचार मंच संचालित करता है और वर्तमान विवाद का आधार बनी 22 अप्रैल 2026 की सामग्री विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के प्रतिनिधि राकेश रंजन महतो का साक्षात्कार थी। पोर्टल ने कहा है कि उसके यूट्यूब चैनल एवं समाचार पोर्टल पर स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि यह एक विचार एवं अभिमत मंच है, जहां असहमति की स्थिति में दूसरे पक्ष को भी अपना दृष्टिकोण रखने का अवसर दिया जाता है।
कानूनी जवाब में यह भी कहा गया है कि Manbhum Updates आज भी मानीकुई स्थित स्वर्णरेखा नदी में कथित अवैध बालू खनन के संबंध में जिला खनन पदाधिकारी का पक्ष प्रकाशित करने के लिए तैयार है। वहीं नोटिस में उल्लिखित 26 मई 2026 से संबंधित समाचार की जानकारी होने से भी पोर्टल ने इनकार किया है।
पैरा-वार जवाब में कहा गया है कि Manbhum Updates ने जिला खनन पदाधिकारी सहित किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास नहीं किया है। इसके विपरीत, समाचार पोर्टल ने केवल जनहित के मुद्दे से जुड़ी बातों को प्रकाशित किया है।
जवाब में यह भी कहा गया है कि नोटिस में किए गए कुछ दावे संदिग्ध प्रतीत होते हैं, विशेषकर मानीकुई स्थित स्वर्णरेखा नदी से कथित अवैध बालू खनन तथा उससे पुल को हो रहे नुकसान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए।
Manbhum Updates ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि 22 अप्रैल 2026 को प्रकाशित खबर जिला खनन पदाधिकारी के निजी जीवन से नहीं, बल्कि उनके आधिकारिक एवं व्यावसायिक दायित्वों से संबंधित विषय पर आधारित थी।

पोर्टल ने अपने जवाब में कहा है कि उसने भारत के एक पीड़ित नागरिक की बात को जिम्मेदारीपूर्वक प्रकाशित किया है। नोटिस के पैरा 5 से 7 तक किए गए आरोपों को असत्य, गलत एवं किसी भी प्रकार के प्रमाण से रहित बताया गया है।
नोटिस के पैरा 8 के जवाब में Manbhum Updates ने कहा है कि जिला खनन पदाधिकारी स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि संबंधित कार्य डी-सिल्टिंग अर्थात गाद हटाने का कार्य है तथा उसमें विभाग की कोई भूमिका नहीं है। जवाब में सवाल उठाया गया है कि यदि ऐसा है तो क्या संबंधित क्षेत्र को उनकी निजी संपत्ति माना जाए, जिसकी सफाई वे अपने निजी व्यय से कर रहे हैं।
पैरा 9 एवं 10 के जवाब में कहा गया है कि Manbhum Updates भारत के पीड़ित नागरिकों को अपने विचार रखने का मंच प्रदान करता है। यदि किसी नागरिक की शिकायत यह है कि किसी पदाधिकारी द्वारा देशद्रोह, चोरी अथवा भ्रष्टाचार जैसा कोई कृत्य किया गया है, तो वह शिकायत उस नागरिक का दृष्टिकोण है, जिसे मंच उपलब्ध कराया गया है।
पैरा 12 के उत्तर में जिला खनन पदाधिकारी द्वारा दिए गए सभी निर्देशों एवं की गई मांगों को अवैध एवं मनमाना बताया गया है।
अपने निष्कर्ष में Manbhum Updates ने कहा है कि जिला खनन पदाधिकारी द्वारा भेजा गया विधिक नोटिस निराधार, मनमाना एवं विधिसम्मत आधार से रहित है, इसलिए इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही पोर्टल ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा हेतु तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी कार्रवाई करने एवं अपना बचाव करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
उल्लेखनीय है कि जिला खनन पदाधिकारी के नोटिस के जवाब में भेजे गए इस विस्तृत प्रतिउत्तर के बाद मामला अब केवल एक कानूनी नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जनहित के मुद्दों पर पत्रकारिता और लोक सेवकों की जवाबदेही को लेकर एक व्यापक कानूनी बहस का विषय बनता दिख रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला खनन पदाधिकारी अथवा खनन विभाग इस जवाब पर क्या रुख अपनाता है।

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