डीजल महंगा, अब बस सफर भी होगा महंगा! झारखंड में किराया बढ़ाने की तैयारी, आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

MANBHUM UPDATES
3 Min Read

डीजल महंगा, अब बस सफर भी होगा महंगा! झारखंड में किराया बढ़ाने की तैयारी, आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा बोझ

रांची, 04 जून : महंगाई की मार झेल रही जनता को जल्द ही एक और बड़ा झटका लग सकता है। झारखंड में निजी बसों का किराया 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी चल रही है। झारखंड बस ओनर एसोसिएशन ने बढ़ते डीजल मूल्य, टोल टैक्स और परिचालन खर्च का हवाला देते हुए परिवहन विभाग को किराया वृद्धि का प्रस्ताव सौंपा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो रोजाना बसों से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

बस मालिकों का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, टायर, टोल टैक्स और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है, जबकि बस किराये में वर्षों से कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया है। ऐसे में वर्तमान किराये पर बसों का संचालन आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है।

हालांकि दूसरी ओर सवाल यह भी उठ रहा है कि बढ़ती महंगाई के दौर में आम जनता पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में काम, पढ़ाई, इलाज और व्यवसाय के लिए आने-जाने वाले हजारों लोग बसों पर ही निर्भर हैं। किराया बढ़ने से उनकी मासिक यात्रा लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

जानकारी के अनुसार वर्तमान में रांची से पटना का बस किराया लगभग 500 रुपये है, जो बढ़कर 600 रुपये तक पहुंच सकता है। इसी तरह रांची से कोलकाता, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, गढ़वा, गुमला, सिमडेगा और अन्य प्रमुख रूटों पर भी यात्रियों को अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है।

यदि किसी रूट का वर्तमान किराया 100 रुपये है तो बढ़ोतरी के बाद यात्रियों को 115 से 120 रुपये तक देना पड़ सकता है। वहीं 200 रुपये का किराया 230 से 240 रुपये तक पहुंच सकता है। रोजाना सफर करने वाले मजदूरों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन सकता है।

झारखंड बस ओनर एसोसिएशन की बैठक में किराया वृद्धि पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा जाएगा। फिलहाल कुछ रूटों पर किराया बढ़ाने की चर्चा शुरू हो चुकी है।

जनता के सामने बड़ा सवाल

बस मालिक बढ़ती लागत का हवाला देकर किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आम लोगों का सवाल है कि जब खाद्य पदार्थ, गैस, बिजली और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें पहले से बढ़ी हुई हैं, तब परिवहन खर्च में बढ़ोतरी से उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ जाएंगी। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह बस संचालकों की समस्याओं और आम जनता के हितों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है।

आने वाले दिनों में होने वाला फैसला न सिर्फ बस संचालकों बल्कि लाखों यात्रियों की जेब और उनके दैनिक बजट को भी प्रभावित करेगा।

Share This Article