राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी उत्सुकता, जयराम महतो के रुख पर टिकी राजनीतिक निगाहें
रांची, 03 जून : झारखंड की राजनीति में क्षेत्रीय भाषाओं, खतियान आधारित स्थानीय नीति, नियोजन नीति, विस्थापन और स्थानीय युवाओं को रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर अपनी अलग पहचान बनाने वाले जयराम महतो इन दिनों अपेक्षाकृत नरम राजनीतिक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। विधायक बनने से पहले जिन मुद्दों पर उनका आक्रामक तेवर लगातार देखने को मिलता था, वह धार अब पहले जैसी नहीं दिख रही है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में उनके बदले हुए राजनीतिक व्यवहार को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा पहुंचने के बाद जयराम महतो की राजनीति में आए बदलाव को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में उनकी ओर से कोई स्पष्ट टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन समर्थकों और विरोधियों के बीच यह चर्चा लगातार जारी है कि आखिर उनके राजनीतिक तेवरों में यह बदलाव क्यों आया है।
इसी बीच आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर भी जयराम महतो की भूमिका चर्चा के केंद्र में आ गई है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के एकमात्र विधायक होने के बावजूद उनका समर्थन किसे मिलेगा, इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की निगाहें उन पर टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान जयराम महतो ने खुद को राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया था। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोला था। लोकसभा चुनाव में उन्होंने गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और कई सीटों पर अपने समर्थित प्रत्याशी भी उतारे थे।
इसके बाद उन्होंने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) का गठन किया, जिसे बाद में चुनाव आयोग से मान्यता भी प्राप्त हुई। विधानसभा चुनाव में जयराम महतो ने डुमरी और बेरमो दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। इनमें डुमरी विधानसभा क्षेत्र से उन्हें जीत हासिल हुई, जबकि उनकी पार्टी ने राज्य की 71 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी दो सीटों पर दूसरे स्थान पर रही, जबकि कई सीटों पर तीसरे और चौथे स्थान पर अपना प्रभाव दर्ज कराने में सफल रही।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जयराम महतो का प्रभाव मुख्य रूप से कुड़मी बहुल क्षेत्रों में अधिक दिखाई दिया था। इसी आधार पर उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
अब राज्यसभा चुनाव नजदीक आते ही सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि जयराम महतो का समर्थन किसे मिलेगा। क्या वे सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा नीत गठबंधन के साथ जाएंगे या फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे? इस प्रश्न का उत्तर केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि JLKM के कार्यकर्ता और समर्थक भी जानने को उत्सुक हैं।
फिलहाल जयराम महतो ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर उनका अगला राजनीतिक कदम झारखंड की राजनीति में नई चर्चा और संभावित समीकरणों को जन्म दे सकता है।