चांडिल में सनसनीखेज वारदात : मां ने रची साजिश, मासूम की हत्या कर बच्चा चोरी की फैलाई अफवाह — सूझबूझ से हालात संभालते हुए पुलिस ने खोला राज

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चांडिल, 23 मार्च : चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत घोड़ानेगी डैम कॉलोनी में रविवार शाम घटी एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। एक मां ने अपनी ही तीन वर्षीय मासूम बेटी की गला घोंटकर हत्या कर दी और सच्चाई छिपाने के लिए बच्चा चोर गिरोह द्वारा अपहरण की अफवाह फैलाकर पूरे क्षेत्र में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बना दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, डैम कॉलोनी निवासी सोना राम लोहार की पत्नी लक्ष्मी लोहार ने अपनी बेटी की हत्या कर शव को घर में ही छिपा दिया। इसके बाद उसने शोर मचाते हुए दावा किया कि बच्चा चोर गिरोह उसकी बेटी को उठा ले गया है। देखते ही देखते यह बात आग की तरह फैल गई और कॉलोनी में भारी भीड़ जुट गई। आक्रोशित लोग कथित गिरोह की तलाश में निकल पड़े, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए और किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बढ़ गई।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चांडिल थाना प्रभारी दिलशन बिरुआ ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने पहले भीड़ को शांत और नियंत्रित किया, जो उस समय बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसके बाद उन्होंने पूरी पेशेवर कुशलता के साथ मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी महिला ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हुए अपने ही पड़ोसी, जिसे वह अपना कथित प्रेमी बताती थी, पर हत्या का आरोप मढ़ दिया।

हालांकि, थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तथ्यों का सूक्ष्म विश्लेषण किया और कथित प्रेमी से सघन पूछताछ की, जिसमें महिला के बयान में कई विरोधाभास सामने आए। पुलिस ने बिना किसी जल्दबाजी के तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया, जिससे मामला धीरे-धीरे स्पष्ट होता गया।

इसी दौरान देर रात सूचना मिली कि बच्ची को परिजन इलाज के लिए चिलगु स्थित एक क्लिनिक ले गए थे, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी महिला फरार हो गई थी, लेकिन थाना प्रभारी दिलशन बिरुआ के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसका पीछा किया और अंततः सोमवार को उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी महिला की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी, जिसके चलते उसने यह जघन्य कदम उठाया।

इस पूरे घटनाक्रम में थाना प्रभारी दिलशन बिरुआ की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। जिस तरह उन्होंने उग्र और भड़काऊ माहौल के बीच संयम बनाए रखा, भीड़ को नियंत्रित किया और कुछ ही घंटों में सच्चाई उजागर कर दी, वह उनकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा का स्पष्ट प्रमाण है। उनकी तत्परता ने न केवल एक निर्दोष व्यक्ति को झूठे आरोपों से बचाया, बल्कि संभावित भीड़ हिंसा जैसी गंभीर स्थिति को भी टाल दिया। थाना प्रभारी दिलशन बिरुआ की तत्परता, सूझबूझ और प्रभावी नेतृत्व ने न केवल मामले का शीघ्र खुलासा किया, बल्कि संभावित भीड़ हिंसा को टालते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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